बोड़ाम प्रखंड के मोहनपुर गांव में सबर जाति के लिए स्वीकृत हुआ था आवास
जमशेदपुर : सरकारी विभाग में लेट लतीफी व लापरवाही का जीता जागता उदाहरण बोड़ाम प्रखंड के मोहनपुर टोला में आदिम जनजाति (सबर) परिवार के रहने के लिए बना बिरसा आवास है. वितीयी वर्ष 2019-20 में 23 लाभुकों के लिए स्वीकृत आवास पांच वर्ष बाद भी अधूरा है. अब तक फाइनल किस्त का भुगतान नहीं किया गया है. साथ ही उक्त आवास की पूर्णता का प्रमाण पत्र (सीसी) भी विभाग ने नहीं दिया है. जिसके कारण आवास विहिन सबर परिवार जर्जर घर अथवा खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं. शुक्रवार को इस मामले की शिकायत उपायुक्त से की गई. उन्हें बताया गया कि 11 अक्टूबर 2019 को पहली किस्त के रुप में 40 हजार रुपये का भुगतान किया गया. उसके बाद दूसरी किस्त 13 फरवरी 2020 को मिली. उक्त राशि के अलावे लाभुकों ने मवेशी (बैल तथा बकरी) बेंचकर आवास निर्माण में अपना पैसा लगा दिया. फिर भी आवास अधूरा है. अभी भी दीवार का प्लास्टर, घर का दरवाजा खिड़की नहीं लग पाया है. लाभुकों ने उपायुक्त से आवास निर्माण की शेष राशि जल्द से जल्द भुगतान कराने की मांग की. साथ ही इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की.
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पीएलवी की मदद से उपायुक्त के पास पहुंचा मामला
आदिम जनजाति (सबर) परिवार के बिरसा आवास निर्माण का मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के पीएलवी निताई चंद्र गोराई की मदद से उपायुक्त के पास पहुंचा. इससे पहले लाभुक स्थानीय पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय में शिकायत दर्ज करा चुके थे. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. पीएलवी निताई चंद्र गोराई ने बताया कि डालसा की ओर से इन दिन 90 दिवसीय अवेयरनेश एंड आउटरीच कैंपेन चलाया जा रहा है. उक्त कैंपेन के तहत डालसा के पीएलवी मोहनपुर टोला पहुंचे. जहां लाभुकों (सबर परिवार) ने आवास निर्माण की राशि बकाया होने की शिकायत की.
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