- घाटशिला और परसुडीह में दो दिवसीय प्रशिक्षण, उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर
- कृषि एवं संबद्ध योजनाओं की जानकारी से किसान होंगे सशक्त
जमशेदपुर/घाटशिला : संयुक्त कृषि भवन खासमहल, परसुडीह स्थित आत्मा सभागार एवं घाटशिला के कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय कृषक–वैज्ञानिक अंतर्मिलन कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पहले दिन किसानों को रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलों एवं सब्जियों के प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन, कीट एवं व्याधियों के प्रकोप से बचाव और कीटनाशक के सुरक्षित उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र एवं क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा दी गई। वरीय वैज्ञानिक डॉ. जयंती लाल, सह निदेशक डॉ. एन. सलाम, कृषि अभियंत्रण विशेषज्ञ एस. एस. मुंडा और वैज्ञानिक डॉ. सीमा सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण, रबी फसल प्रबंधन, कृषि यंत्रों के रखरखाव, जल प्रबंधन और पोषण वाटिका पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया। घाटशिला अनुमंडल के सात प्रखंडों से आए कुल 27 प्रगतिशील किसानों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और वैज्ञानिकों से विभिन्न समस्याओं पर सवाल भी पूछे।
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रबी फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर किसानों को प्रशिक्षण
आत्मा सभागार में आयोजित समानांतर सत्र में जिला कृषि पदाधिकारी–सह–परियोजना निदेशक, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी, पशुपालन विभाग की भ्रमणशील पशु चिकित्सक डॉ. मेरी निशा तिग्गा और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. देवाशीष महतो ने किसानों को तकनीकी जानकारी दी। विभागीय अधिकारियों ने कृषि एवं संबद्ध विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं लाभकारी गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से अवगत कराया। धालभूम अनुमंडल के चार प्रखंडों के कुल 29 किसान इस सत्र में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए उत्पादन बढ़ाना और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे अंतर्मिलन कार्यक्रम किसानों को सही दिशा और व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।



















































