खूंटी: झारखंड राज्य किसान सभा के राज्यव्यापी आव्हान पर खूंटी जिला किसान सभा ने रोनहे, हुसीर, तोरपा, ततौली, गोपला, कुमंग समेत दर्जनों गांवों में किसान विरोधी बीज विधेयक और बिजली विधेयक 2025 की प्रतियां जलाई। प्रदर्शन के दौरान किसान नारे भी लगा रहे थे, जैसे—“किसान विरोधी बीज और बिजली विधेयक वापस लो”, “बिजली कारपोरेट के हवाले नहीं चलेगा”, “मोदी सरकार हाय हाय”।
मुख्य वक्ता और झारखंड राज्य किसान कौंसिल सदस्य प्रदीप गुड़िया ने कहा कि यह दोनों विधेयक किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि मोदी सरकार कृषि क्षेत्र को कारपोरेट कंपनियों के हाथों सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में किसान विरोधी भूमि अध्यादेश और 2020 में तीन कृषि काला कानून भी इसी तरह कारपोरेट के हितों के लिए लाए गए थे, लेकिन किसानों के व्यापक आंदोलन के कारण उन्हें रद्द करना पड़ा।
प्रदीप गुड़िया ने कहा, “बीज और बिजली विधेयक किसानों पर एक और बड़ा हमला है। मोदी सरकार ने किसानों के साथ जो तीन महीने के भीतर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का समझौता किया था, उसे आज तक लागू नहीं किया। वर्तमान में धान की खरीदी केवल 15–16 रुपये प्रति किलो हो रही है।”
इस अवसर पर कल्याण गुड़िया, संतोष बोदरा, रामजन बोदरा, रेजन बोदरा, गोमया होरो, जुलियस टोपनो, गोपी स्वासी, अरुण बरजो, लुकस बोदरा, रोयन बारला, इमेल टोपनो, मसीह हेबरम, अमित होरो, पुनम बोदरा, एन.एम. बोदरा, हालेन गुड़िया, दिलीप बारला, आसरीय गुड़िया, एन.ई.आर. गुड़िया, जोसेफ गुड़िया सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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