Deoghar: पुण्यश्लोका अहिल्याबाई के 300वें जन्मोत्सव पर छात्राओं लिया रानी का गेटअप, हुई यादगार श्रद्धांजलि

देवघर: भारत विकास परिषद, देवघर शाखा द्वारा लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती श्रद्धा और प्रेरणा के साथ मनाई गई. कार्यक्रम का आयोजन मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय मातृ मंदिर में किया गया, जहां छात्राओं ने उनके जीवन और कृतित्व को मंच पर जीवंत कर दिया.

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम्, भारत माता, स्वामी विवेकानंद और लोकमाता अहिल्याबाई की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर किया गया. इसमें विद्यालय परिवार, परिषद के अधिकारी एवं सदस्य सहित लगभग 125 लोग उपस्थित रहे.

छात्राओं ने पहना रानी का रूप, बोले प्रेरणादायक संवाद
विद्यालय की कक्षा 9 से 12 तक की 13 छात्राओं ने अहिल्याबाई के जीवन पर भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया. कुछ छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा और गेटअप के साथ प्रस्तुति दी, जिससे सभागार में ऐतिहासिक वातावरण बन गया.

निर्णायक मंडल में आर एल सर्राफ विद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. विजय कुमार और संदीपनी पब्लिक स्कूल की निदेशिका कंचन मूर्ति साह शामिल रहीं. उन्होंने छात्राओं को अहिल्याबाई के जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंग रोचक शैली में सुनाए.

धर्म, न्याय और सेवा का स्वरूप थीं अहिल्याबाई: वक्ता
कार्यक्रम में परिषद अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने विद्यालय को धन्यवाद देते हुए कहा कि अहिल्याबाई केवल एक रानी नहीं थीं, वे धर्म और राष्ट्रधर्म की मूर्त प्रतीक थीं. विदेशी आक्रमणों के कठिन काल में उन्होंने देश के तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण कर भारतीय संस्कृति को सहेजा.

निर्णायकों ने बताया कि अहिल्याबाई ने विधवा विवाह को प्रोत्साहन, बाल विवाह के विरोध, महिला उद्योगों के विकास जैसे कार्य कर समाज में बड़ा बदलाव लाया. उन्होंने अकेले अपने संकल्प से काशी विश्वनाथ जैसे मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया.

डॉ. विजय कुमार ने यह भी बताया कि अहिल्याबाई इतनी न्यायप्रिय थीं कि जब उनके पुत्र ने गलत कार्य किया तो उन्होंने उसे मृत्युदंड तक दे दिया.

‘लोकमाता’ की विरासत आज भी प्रासंगिक
विद्यालय की प्राचार्या बिशु किरण ने कहा कि अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था. उन्होंने 1767 से 1795 तक होल्कर वंश का कुशल संचालन किया.

उन्होंने भारतभर में 100 से अधिक मंदिर, घाट, कुएं और बावड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया. उनकी सरलता, धर्मनिष्ठा और सेवा भावना के कारण ही वे ‘लोकमाता’ कहलाईं.

प्रतियोगिता के परिणाम और सम्मान
कार्यक्रम के अंत में परिषद की सचिव कंचन शेखर सिंह ने कहा कि अहिल्याबाई की स्मृति में यह आयोजन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है.

भाषण प्रतियोगिता में वंशिला गुप्ता प्रथम, नम्रता कुमारी द्वितीय, अदिति कुमारी झा तृतीय, राधा कुमारी चतुर्थ तथा सृष्टि कुमारी पंचम स्थान पर रहीं. सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया.

परिषद के सेवा प्रमुख रंजीत बरनवाल, महिला सहभागिता प्रमुख कंचन मूर्ति साह और कार्यक्रम संयोजक अंबुज कुमार मिश्र ने आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया.

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur: हर गली, हर मोहल्ले तक पहुँचेगा डेंगू रोकथाम अभियान, टास्क फोर्स बैठक में उभरे नए आयाम

Spread the love

Related Posts

Gua : वेल्डन फ्यूचर एकेडमी स्कूल की वंशिका साहू ने टॉपर बनकर रचा इतिहास, बड़ाजामदा थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव ने पुरस्कार देकर किया सम्मानित

सफलता का मुख्य रहस्य निरंतर प्रयास, दृढ़ इच्छाशक्ति, सही योजना और सकारात्मक मानसिकता का संयोजन है : बालेश्वर उरांव गुवा : वेल्डन फ्यूचर एकेडमी स्कूल की 25-26 वार्षिक परीक्षा में…

Spread the love

Jamshedpur : जुगसलाई में भाई बहन की पिटाई करने वाला शिक्षक गिरफ्तार, भेजा गया जेल

जमशेदपुर : जुगसलाई थाना क्षेत्र के रहने वाले भाई बहन का परीक्षा में कम अंक आने पर काफी पिटाई करने वाले शिक्षक प्रभात कुमार भगत को जुगसलाई पुलिस ने शनिवार…

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share this Page

Slide-In Box help you to share the page on the perfect time