रांची: आदिशक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आज से आरंभ हो गया। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना होगी। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना का विधान है।
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह स्नान-ध्यान कर शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें। शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजे से 11 बजे तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 12:06 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक रहेगा।
- कलश स्थापना करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
- अक्षत रखकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल से अभिषेक करें और लाल फूल, लाल चंदन, लाल फल अर्पित करें।
अंत में आरती कर मां को प्रसन्न करें।
मां शैलपुत्री को गाय का घी अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
मां शैलपुत्री की महिमा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। पूर्व जन्म में वे सती थीं, जिन्होंने अपने पिता दक्ष द्वारा शिव का अपमान देख आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद वे पुनः हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री बनीं।
मां शैलपुत्री की पूजा से साधक को सांसारिक सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उनके मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है:
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।’
व्रत और नियम
शास्त्रों में नवरात्रि के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है—
- बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना अशुभ है।
- यदि घर में कलश स्थापना या अखंड ज्योति है तो घर खाली न छोड़ें।
- चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें।
- यदि अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं, देवी से क्षमा मांगकर मंत्र जपते हुए दोबारा ज्योति प्रज्वलित करें।
नवरात्रि इस बार 10 दिन की
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 9 नहीं, बल्कि 10 दिन की होगी। 22 सितंबर से शुरू होकर तृतीया तिथि दो दिन (24 और 25 सितंबर) रहने से एक अतिरिक्त दिन जुड़ गया है। इसे शुभ माना जा रहा है, क्योंकि बढ़ती तिथि ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि की बधाई देते हुए ट्वीट किया— “भक्ति, साहस और संकल्प का यह पावन पर्व सभी के जीवन में नई शक्ति और विश्वास लेकर आए। जय माता दी!”
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