देवघर: दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद देवघर में गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल देखने को मिली। उनके शिष्य और झारखंड आंदोलनकारी सरोज सिंह ने सनातन परंपरा के अनुसार पहले क्षौरकर्म कराया और फिर द्वादश (12वें दिन) कर्म के तहत जसीडीह के अंधरीगादर में शांति भोज का आयोजन किया।
पांच हजार से ज्यादा लोग जुटे
इस शांति भोज में करीब पांच हजार महिला-पुरुष शामिल हुए। आयोजन में देवघर विधायक सुरेश पासवान, झामुमो नेता सूरज झा, राजाराम, जिला कल्याण पदाधिकारी दयानंद दुबे और एएस कॉलेज के प्राध्यापक प्रो. नंदन किशोर द्विवेदी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
गुरु-शिष्य परंपरा की अनोखी झलक
आयोजनकर्ता सरोज सिंह ने बताया कि शिबू सोरेन उनके लिए केवल राजनीतिक मार्गदर्शक ही नहीं बल्कि गुरु भी थे। उन्होंने कहा – “झारखंड आंदोलन के दौरान गुरुजी ने मेरा हाथ पकड़कर राजनीति सिखाई थी। उनके निधन के बाद मैंने परंपरा के अनुसार श्राद्ध कर्म और शांति भोज कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।” शांति भोज में आए लोगों ने दिशोम गुरु को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनकी शिक्षाओं और संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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