बोकारो: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) द्वारा कर्मचारियों के लिए निर्मित आवासों की स्थिति दिन-ब-दिन खस्ताहाल होती जा रही है. मरम्मत के अभाव में कभी छत गिर रही है, तो कभी सीढ़ियाँ ढह रही हैं. दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ऐसी घटनाएं अब सामान्य हो गई हैं.
केवल कागज़ों पर होती है मरम्मत
ठेकेदारों की ‘थूक पॉलिश’ से चल रही है व्यवस्था
हर वर्ष प्लांट प्रबंधन द्वारा आवास मरम्मत के नाम पर टेंडर निकाले जाते हैं. लाखों रुपये स्वीकृत होते हैं. लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ठेकेदार महज़ सतही रंग-रोगन कर मरम्मत का कार्य पूरा कर लेते हैं और भुगतान निकाल लेते हैं. परिणामस्वरूप भवनों की वास्तविक हालत जस की तस बनी रहती है.
हादसा टला, पर संकेत गंभीर
ताज़ा मामला हरला थाना अंतर्गत सेक्टर 8C, स्ट्रीट नंबर 33 के आवास संख्या 1379 का है. अहले सुबह आवास की बालकनी का छज्जा अचानक नीचे गिर पड़ा और ठीक नीचे स्थित लीजधारी के मकान (संख्या 1373) पर जा गिरा. सौभाग्यवश कोई जनहानि नहीं हुई, पर घर में रखे कीमती सामान क्षतिग्रस्त हो गए.
अवैध कब्जा और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी
उक्त ब्लॉक में कुल 9 आवास हैं, जिनमें सिर्फ 3 में लीजधारी निवास करते हैं. शेष 6 आवासों पर अवैध कब्जाधारी और असामाजिक तत्वों ने डेरा जमा रखा है. इन पर न तो प्रशासन की निगाह है और न ही कोई कार्रवाई.
अधिकारी वसूली में व्यस्त, मरम्मत से बेखबर
नगर प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी नियमित रूप से बिजली बिल वसूली के लिए लीजधारियों पर दबाव बनाते हैं. लेकिन इन्हीं आवासों की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर उनका रवैया उदासीन बना हुआ है. इससे लीजधारी खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
लीजधारियों की मांग—हो ठोस मरम्मत और निगरानी
स्थानीय लीजधारियों का कहना है कि वे कई बार प्लांट प्रबंधन से मरम्मत की मांग कर चुके हैं. लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. यदि समय रहते जर्जर आवासों की मरम्मत नहीं की गई, तो किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
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