सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला के निर्देश पर बुधवार रात ईचागढ़ और तिरुलडीह थाना क्षेत्रों में बालू तस्करी के खिलाफ औचक छापामारी अभियान चलाया गया. चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में जिला खनन विभाग की टीम ने टीकर, सोडो, सपादा और तिरुलडीह समेत कई इलाकों में जांच अभियान चलाया. इस दौरान टीम को चार हाइवा वाहन अवैध रूप से बालू लदे मिले, जिन्हें जब्त कर थाना को सौंप दिया गया. जिला प्रशासन अवैध खनन, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चला रहा है.
ग्रामीणों की शंका हुई सही साबित
तिरुलडीह थाना क्षेत्र के बड़ा लापांग में ग्रामीणों ने पश्चिम बंगाल जाने वाली सड़क पर बड़ी संख्या में बालू लदे हाइवा को रोका था. धार्मिक अनुष्ठान के चंदा संग्रह के दौरान मुख्य सड़क पर लगभग 50 बालू लदे हाइवा खड़े हो गए थे, जिससे सड़क पर अव्यवस्था फैल गई. इस दौरान ग्रामीणों और हाइवा चालकों के बीच हल्की झड़प भी हुई.
ग्रामीणों का कहना है कि ईचागढ़ और तिरुलडीह थाना क्षेत्रों में रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर स्वर्णरेखा नदी से अवैध रूप से बालू निकाला जाता है. इससे न केवल नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है, बल्कि सरकार को राजस्व की भी भारी हानि हो रही है. प्रशासन की छापामारी के दौरान हाइवा जब्त किए जाने के बाद ग्रामीणों की आशंका सही साबित हो गई है. उनके अनुसार, इस मार्ग पर हर रात बालू लदे हाइवा गुजरते हैं.
पुलिस क्यों रहती है नाकाम?
ग्रामीणों का कहना है कि बालू तस्करी रोकने के लिए पुलिस द्वारा चलाए गए अभियानों का अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. हर बार पुलिस के अभियान में बालू लदे वाहन नहीं मिलते, जबकि पुलिस के बगैर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई छापेमारी में अवैध बालू परिवहन पकड़ा जाता है.
जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त समेत अन्य पदाधिकारियों को बालू तस्करी रोकने के लिए पत्र सौंपा था. इसके कुछ घंटे बाद ही तिरुलडीह पुलिस ने जांच अभियान चलाया, लेकिन पुलिस को अवैध खनन या परिवहन का कोई प्रमाण नहीं मिला. कुछ ही दिनों बाद ग्रामीणों ने बालू लदे हाइवा की लंबी कतार सड़क पर देखी. इसके एक दिन बाद पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त कार्रवाई भी नाकाम रही. सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस की कार्रवाई क्यों असफल हो जाती है और प्रशासन को ही हर बार सफलता क्यों मिलती है?
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