धनबाद: मंईयां सम्मान योजना का लाभ लेने के लिए मंगलवार को महिलाओं की भीड़ एग्यारकुण्ड प्रखंड कार्यालय में उमड़ पड़ी. महिलाओं की लंबी कतारें कार्यालय गेट से लेकर सड़क तक फैल गई थीं. कार्यालय खुलने से पहले ही महिलाओं ने कतारों में लगकर अपने पैसे की प्राप्ति के लिए इंतजार करना शुरू कर दिया.
राशि का भुगतान न होने से महिला श्रेणी में असंतोष
महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें मंईयां सम्मान योजना की राशि प्राप्त हुई थी, लेकिन उसके बाद से दूसरे महीने से उनके खातों में कोई राशि नहीं आई. बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसी थीं, जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन तो किया था, लेकिन हार्ड कॉपी जमा नहीं की थी, जिसके कारण वे अपडेट कराने के लिए कार्यालय पहुंची थीं. वहीं कई महिलाओं का आवेदन त्रुटिपूर्ण था, जिसे सुधारने के लिए वे कार्यालय पहुंची थीं.
वेतन में होल्ड और त्रुटियों के कारण भुगतान में देरी
धनबाद जिले में लगभग 2.96 लाख महिलाओं के खाते में होली से पहले मंईयां सम्मान योजना की राशि भेजी गई थी. हालांकि, करीब 75 हजार महिलाओं के आवेदन में त्रुटियों के कारण राशि होल्ड कर दी गई है. इन आवेदनकर्ताओं के खाते का सत्यापन कार्य जारी है, जिसके बाद भुगतान किया जाएगा. कई महिलाओं के आवेदन में बैंक खाता नंबर और ऑनलाइन खाता नंबर में असमंजस होने के कारण भी उन्हें होल्ड पर रखा गया है. इसके अलावा, कई मामलों में आवेदन सही होने के बावजूद राशि खातों में नहीं पहुंची. यह स्थिति निरसा, कलियाशेल, एग्यारकुंड और चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्र सहित सभी प्रखंडों में देखी जा रही है.
राजनीतिक आरोप और आगामी चुनाव के प्रभाव
इस मुद्दे पर जीप गुलाम कुरैशी ने कहा कि मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना मंईयां सम्मान योजना का लाभ सभी महिलाओं को मिलेगा. जांच जारी है, और यह पाया गया है कि कई ऐसे लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके लाभार्थी नहीं हैं, जिसके कारण वास्तविक लाभार्थी महिलाएं वंचित रह रही हैं. कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और जल्द ही सभी के खातों में राशि भेजी जाएगी.
एग्यारकुंड प्रखंड के उपप्रमुख बिनोद दास ने आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 के चुनावी वर्ष में सूबे की हेमंत सरकार सत्ता में आने के लिए इस योजना को लॉन्च किया था. दो-तीन महीने तक महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई, लेकिन जैसे ही चुनाव जीतने के बाद सरकार ने लाभार्थियों की छंटनी शुरू कर दी है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि यह मुख्यमंत्री का चुनावी जुमला था. इसके कारण महिलाएं प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
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