देवघर: राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन को “भारतीय संविधान से पहले शरीयत को मानने” वाले बयान पर चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ी. चार दिनों तक जारी सियासी घमासान के बाद अब मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई देते हुए कहा है कि भारतीय संविधान उनके लिए सर्वोपरि है.
संविधान के प्रति आस्था जताई, बाबा साहेब को बताया प्रेरणा स्रोत
मंत्री ने अपनी ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है कि उन्हें भारतीय संविधान में पूर्ण आस्था और निष्ठा है. उन्होंने कहा, “मैं बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति गहरी श्रद्धा रखता हूं. उनके विचारों से प्रेरणा लेकर मैंने अपने सार्वजनिक जीवन में समावेशिता और सामाजिक न्याय के लिए कार्य किया है.”
“हर धर्म से प्रेम हो, पर नफरत न हो”
हफीजुल हसन ने कहा कि देश में केंद्रीय मंत्रियों तक द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए नफरत भरे शब्दों का प्रयोग किया गया. “किसी ने हमें देश छोड़ने को कहा, किसी ने मंच से गोली मारने का नारा लगवाया. मैं मानता हूं कि हर किसी को अपने धर्म से प्रेम करने का अधिकार है, लेकिन यह प्रेम किसी अन्य धर्म के प्रति नफरत में न बदले”, मंत्री ने कहा.
संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने का दावा
मंत्री ने अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि “मैं दोहराना चाहता हूं कि संविधान मेरे लिए सर्वोपरि है. मेरा कोई भी कथन या कार्य संविधान के मूल्यों के खिलाफ नहीं रहा है. मैं अपने कर्तव्यों का निर्वहन संवैधानिक निष्ठा और सभी समुदायों के लिए न्याय व समानता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता के साथ करता रहूंगा.”
इसे भी पढ़ें :
Jharkhand Breaking: मंत्री हफीजुल हसन के शरीयत वाले बयान ने लिया उग्र रूप, आक्रोश मार्च – हाथ में संविधान लिए राजभवन पहुंचे भाजपा नेता
There is no ads to display, Please add some



















































