Krishna Janmashtami 2025: कान्हा जन्म की रात आज, जानिए क्यों खीरा, छप्पन भोग और मोरपंख हैं खास?

जमशेदपुर:  आज पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में मध्यरात्रि को कंस की कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। जन्म लेते ही पूरी जेल प्रकाशमय हो उठी और वातावरण मंगलमय हो गया।

जन्माष्टमी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत हजार एकादशी व्रतों के बराबर फल देने वाला होता है। इस दिन ध्यान, जप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। भविष्य पुराण में लिखा है कि इस व्रत से घर में अशांति, अकाल मृत्यु और दुर्भाग्य दूर होते हैं।

खीरे का संबंध कान्हा जन्म से
कृष्ण जन्मोत्सव पर खीरे का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि खीरा गर्भ का प्रतीक है और इसके अंदर के बीज नवजीवन व उत्पत्ति का संकेत देते हैं। इसलिए जन्माष्टमी पर नाल छेदन की रस्म खीरे से की जाती है।

 

श्रीकृष्ण और छप्पन भोग
कृष्ण भक्तों के लिए छप्पन भोग सबसे खास परंपरा है। इसे लेकर दो कथाएं प्रचलित है.

पहली कथा: जब इंद्र ने बृजवासियों पर बारिश बरसाई तो श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की। उस दौरान उन्होंने भोजन नहीं किया। बाद में मां यशोदा और बृजवासियों ने सात दिन × आठ प्रहर के हिसाब से 56 व्यंजन बनाकर उन्हें अर्पित किए।

 

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दूसरी कथा: गोकुल की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए व्रत किया था। प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उनकी इच्छा पूरी करने का वचन दिया। खुशी में गोपियों ने 56 प्रकार के भोग उन्हें अर्पित किए।

 

क्यों सजता है कान्हा के मुकुट पर मोरपंख?
कान्हा के मुकुट पर सजे मोरपंख के पीछे कई मान्यताएं हैं:

रामावतार की कथा: जब राम वनवास में थे, तब एक मोर ने सीता की खोज में रास्ता दिखाने के लिए अपने पंख गिराकर मार्ग बताया। इसके बदले भगवान ने वचन दिया कि अगले जन्म में वे मुकुट पर मोरपंख धारण करेंगे।

ज्योतिष कारण: श्रीकृष्ण की कुंडली में कालसर्प योग था। माना जाता है कि मोरपंख रखने से इसका प्रभाव कम होता है।

पवित्रता का प्रतीक: मोर आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करता है। इसी कारण कृष्ण ने उसके पंख को अपने सिर पर धारण कर पवित्रता और संयम का संदेश दिया।

 

 

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