कानपुर: कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिम युवाओं ने “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टर और बैनर लगाए। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे नई परंपरा बताकर आपत्ति जताई। पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए बैनर हटवाए और 9 नामजद समेत 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज कर दी। धाराएं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से जुड़ी हैं।
पुलिस बनाम मुस्लिम पक्ष
पुलिस का कहना है कि मामला सिर्फ बैनर का नहीं, बल्कि बिना अनुमति टेंट लगाने और जुलूस के दौरान दूसरे समुदाय के पोस्टर फाड़ने का भी है।
वहीं मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि मोहम्मद पैगंबर से मोहब्बत जताने को अपराध की तरह दिखाया जा रहा है, जबकि इसमें किसी तरह का भड़काऊ तत्व नहीं है।
यूपी से बाहर तक फैला आंदोलन
कानपुर से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे लखनऊ, बरेली, उन्नाव, महाराजगंज और कौशांबी तक फैल गया। लखनऊ में मुस्लिम महिलाएं विधानसभा गेट नंबर 4 पर बैनर लेकर बैठ गईं, पुलिस ने उन्हें हटाया। नागपुर में मस्जिदों पर “आई लव मोहम्मद” पोस्टर लगाए गए और जुलूस निकाला गया। बरेली में एक मुस्लिम नेता का पुलिस अफसर को धमकाने वाला वीडियो वायरल हुआ। उत्तराखंड के काशीपुर में बिना अनुमति निकले जुलूस में पथराव और झड़प हुई।
सियासत भी गर्माई
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा – “अगर मोहम्मद से मोहब्बत जताना अपराध है तो सजा भुगतने को तैयार हूं।” वर्ल्ड सूफी फोरम और मौलाना तकीर रजा जैसे नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर “#ILoveMohammad” ट्रेंड करने लगा और हजारों लोगों ने इसे अपनी प्रोफाइल तस्वीर बनाया।
भाजपा का जवाब
भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कार्रवाई धर्म देखकर नहीं, बल्कि कानून तोड़ने वालों पर की जा रही है। पोस्टर-बैनर लगाने की तय जगह होती है, नियम तोड़ने पर ही कार्रवाई हुई है।
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