- हृदयस्पर्शी कविताओं से सजी जनवादी लेखक संघ की अनूठी पहल
- देशभर के कवियों ने ऑनलाइन मंच से बिखेरी साहित्यिक चमक
- एक से बढ़कर एक कविताओं ने किया श्रोताओं को भावविभोर
राँची : राँची में जनवादी लेखक संघ, राँची के बैनर तले पहला ऑनलाइन बंगला कवि सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशिष्ट साहित्यिक आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कवियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए अपनी सशक्त और भावप्रवण रचनाओं का पाठ किया। सम्मेलन के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार कुमार विजेंद्र रहे, जबकि सचिव के रूप में एम. ज़ेड. खान ने दायित्व निभाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार रबि कांत भकत ने की। पूरे आयोजन का संचालन सुकेशी कर्मकार एवं रवि वर्मा ने प्रभावशाली ढंग से किया। कवि सम्मेलन के दौरान साहित्य प्रेमियों ने घर बैठे बंगला कविता की समृद्ध परंपरा का आनंद लिया।
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विविध रचनाओं ने छुआ मन, ऑनलाइन मंच की सार्थकता सिद्ध
कविता पाठक वृंद में प्रदीप कुमार प्रमाणिक, माणिक लाल महतो, डॉ. अरूपनंद मंडल, सोमनाथ मंडल, डॉ. प्रोसेनजीत कर्मकार, भवतारण मंडल, देवराज महतो, शेफाली महतो, प्रोनोति गोस्वामी, हिमाद्रि शंकर भकत, वीरेंद्र नाथ घोष, रबि कांत भकत और सुकेशी कर्मकार शामिल रहे। “जागते होबे”, “विपद”, “मुक्ति”, “मनुष्यत्व”, “भालोबासा” और “विषकन्या” जैसी कविताओं ने श्रोताओं को गहरे भावनात्मक स्तर पर प्रभावित किया। सभी कवियों ने संवेदनशील, विचारोत्तेजक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं का पाठ कर सम्मेलन को यादगार बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि ऑनलाइन माध्यम साहित्यिक अभिव्यक्ति के लिए एक सशक्त, प्रभावी और व्यापक मंच के रूप में उभर रहा है।
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