जमशेदपुर: केरला पब्लिक स्कूल, कदमा में शनिवार को आयोजित “युवा सम्मेलन” के तीसरे दिन विद्यार्थियों ने आत्मचिंतन, पारिवारिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण पर आधारित एक प्रेरणादायक सत्र में हिस्सा लिया।
सत्र की शुरुआत प्रार्थना और मौन साधना से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों को 20 मिनट दिए गए ताकि वे अपने विचार डायरी में लिख सकें। इस अभ्यास का उद्देश्य था कि छात्र खुद से जुड़ें, अपने अनुभवों पर सोचें और कृतज्ञता की भावना विकसित करें।
सत्र का संचालन विरल मजूमदार ने किया। उन्होंने ईमानदारी, निःस्वार्थता, प्रेम और पवित्रता जैसे मूल्यों की शक्ति पर बात की। मजूमदार ने कहा — “जब हम भीतर से शुद्ध होते हैं, तो बाहर की दुनिया अपने आप सही हो जाती है।”

अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि परिवार ही चरित्र निर्माण की पहली पाठशाला है। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि परिवार प्रेम, विश्वास और भावनात्मक सहारे का सबसे मजबूत स्तंभ है।
मजूमदार ने कहा कि अहंकार और क्रोध से रिश्ते कमजोर होते हैं, इसलिए हमें इन पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे दूसरों का मूल्यांकन न करें, बल्कि सभी को दयालुता और समझदारी से स्वीकारें, क्योंकि हर व्यक्ति हमें कुछ न कुछ सिखाता है।
सत्र के दौरान कई विद्यार्थियों ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा किए और बताया कि इस सम्मेलन ने उनके सोचने और व्यवहार करने के तरीके को कैसे बदला है। अंत में एक लाइव गतिविधि का आयोजन हुआ, जिसमें यह दिखाया गया कि परिवार और मूल्य मिलकर कैसे एक संतुलित और करुणामय जीवन की नींव रखते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे इन शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाएँगे। सत्र ने यह संदेश दिया कि सच्चा परिवर्तन बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर से शुरू होता है — और परिवार वही शक्ति है, जो इस परिवर्तन को टिकाऊ बनाती है।
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