
पटना: पटना में शुक्रवार रात उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के दूसरे आरोपी विकास उर्फ राजा को पटना पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। बताया गया कि पुलिस आरोपी को पूछताछ के लिए पकड़ने गई थी, लेकिन उसने पुलिस टीम पर ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद राजधानी में हड़कंप मच गया है। फिलहाल पुलिस आगे की छानबीन में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, एनकाउंटर स्थल से दोपहिया वाहन, हथियार और लगभग तीन लाख रुपये की सुपारी की रकम भी जब्त की गई है।
गिरफ्तारी से खुला बड़ा राज़
इस कार्रवाई से पहले, सोमवार देर शाम पुलिस ने मालसलामी क्षेत्र से आरोपी उमेश कुमार उर्फ विजय सहनी को गिरफ्तार किया था। विजय पर ही गोपाल खेमका की हत्या का सीधा आरोप है। उससे पूछताछ के बाद पुलिस को विकास के ठिकाने की जानकारी मिली, जिसके आधार पर छापेमारी की गई।
पुलिस ने विकास को पकड़ने की कोशिश की, पर उसने खुद को घिरता देख फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली से उसकी मौत हो गई।
क्या विकास निर्दोष था? परिवार ने पुलिस पर लगाए आरोप
विकास के परिजनों का कहना है कि वह निर्दोष था। परिजनों के मुताबिक, विकास चेन्नई में नौकरी करता था और उसका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं था। उसकी मां ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे बलि का बकरा बना दिया। विकास की मौत के बाद उसके घर में मातम पसरा है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।
हत्याकांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में नालंदा निवासी कारोबारी अशोक साव को भी गिरफ्तार किया है। पूछताछ में यह सामने आया है कि अशोक साव और गोपाल खेमका के बीच कंस्ट्रक्शन बिजनेस को लेकर विवाद था। इसी रंजिश में अशोक ने खेमका की हत्या की साजिश रची।
सूत्रों की मानें तो अशोक साव ने हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी। इसके बाद प्रोफेशनल शूटर हायर कर इस अपराध को अंजाम दिलवाया गया। शूटर विजय सहनी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अशोक साव के खिलाफ कई अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है।
खेमका परिवार पर दोहरी चोट: पहले बेटा, अब पिता
उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या ने पटना को एक बार फिर अपराध की आग में झोंक दिया है। खेमका कभी मगध हॉस्पिटल के मालिक रह चुके थे और व्यावसायिक जगत में उनकी अच्छी ख्याति थी।
गौरतलब है कि छह वर्ष पहले उनके बेटे गुंजन खेमका की भी वैशाली के औद्योगिक थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब भी यह मामला काफी चर्चित रहा था।
गोपाल खेमका का झुकाव वैचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की ओर था। अब एक बार फिर उनके परिवार को ऐसी ही दुखद त्रासदी का सामना करना पड़ा है।
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