Jamshedpur : बैंक की कानूनी अड़चन ने छीनी सेवानिवृत शिक्षिका अंजलि बोस की जिंदगी

  • बैंक खाता में 25 लाख होते हुए भी समय पर नहीं मिल सका पैसा, मौत के दो घंटे बाद पहुंची मदद
  • सिस्टम की देरी ने छीन ली एक और जान

जमशेदपुर : झारखंड सरकार की सेवानिवृत शिक्षिका अंजलि बोस की मौत ने बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनारी निवासी अंजलि बोस का आज तड़के एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया। विडंबना यह रही कि उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सोनारी शाखा के खाते में लाखों रुपये जमा होने के बावजूद परिजन बैंक की कानूनी अड़चनों के कारण समय पर इलाज नहीं करा सके। अंजलि बोस 2008 में कपाली विद्यालय से सेवानिवृत हुई थीं और सेवानिवृत्ति की पूरी राशि उन्होंने अपने बैंक खाते में जमा कर रखी थी। अविवाहित होने के कारण उन्होंने खाते में किसी को नॉमिनी नहीं बनाया था, जिसका खामियाजा अंततः उनकी जान को चुकाना पड़ा।

इसे भी पढ़ें : Baharagoda : नवोदय विद्यालय बहरागोड़ा में इंटरहाउस योग प्रतियोगिता का आयोजन

बैंकिंग के सख्य नियमों के कारण समय पर नहीं मिला पैसा

परिजनों के अनुसार, अंजलि बोस की तबीयत धीरे-धीरे गंभीर होती चली गई। डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन इलाज के लिए आवश्यक राशि बैंक खाते में होने के बावजूद हाथ में नहीं थी। उनकी छोटी बहन गायत्री बोस लगातार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सोनारी शाखा के चक्कर काटती रहीं, लेकिन बैंक अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर कोई मदद नहीं की। मजबूरी में गायत्री बोस ने भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। विकास सिंह ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति देखी और मामले की गंभीरता को समझते हुए सीधे उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को इसकी सूचना दी।

इसे भी पढ़ें : Potka : पोटका प्रखंड में ग्राम सभा की अनदेखी का आरोप, धार्मिक ट्रस्ट और निर्माण कार्य पर उठा सवाल

इलाज के अभाव में गई सेवानिवृत शिक्षिका की जान

विकास सिंह की पहल पर उपायुक्त ने देर रात ही अंजलि बोस के परिजनों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सोनारी शाखा से संपर्क साधकर सहायता का प्रयास शुरू कराया। इसके बाद आज सुबह लगभग 10:00 बजे बैंक के सभी जिम्मेदार अधिकारी एमजीएम अस्पताल पैसा लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुबह 8:00 बजे ही अंजलि बोस का निधन हो चुका था। अस्पताल पहुंचे बैंक अधिकारियों को परिजनों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने परिजनों से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कही। विकास सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि बैंक अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए यह काम पहले कर दिया होता, तो अंजलि बोस की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना बैंकिंग व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण दोनों पर एक कड़ा सवाल बनकर सामने आई है।


There is no ads to display, Please add some
Spread the love

Related Posts

Kolkata : दक्षिण पूर्व रेलवे 24,033 जल टैंकों की करा रहा सफाई,रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना उद्देश्य 

कोलकाता : दक्षिण पूर्व रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर रखरखाव, सफाई, मरम्मत और जल गुणवत्ता जांच का…

Spread the love

Ranchi : जल संसाधन विभाग में पद समाप्त करने की प्रक्रिया का महासंघ ने किया विरोध, नियमावली में संशोधन की मांग

रांची : झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ त्रिपाठी गुट की कार्यकारिणी की बैठक रविवार को रांची स्थित महासंघ कार्यालय में अध्यक्ष विनीत कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में…

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share this Page

Slide-In Box help you to share the page on the perfect time