Jadugoda : यूसिल अस्पताल में फिटनेस जांच के नाम पर कमीशनखोरी का आरोप, रेफर खेल से बढ़ी परेशानी

  • मामूली ब्लड प्रेशर जांच में टीएमएच रेफर, कंपनी को लाखों की चपत का दावा
  • क्या यूसिल प्रबंधन लेगा कमीशनखोरी पर सख्त फैसला?

जादूगोड़ा : यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसिल) की जादूगोड़ा अस्पताल में फिटनेस जांच के नाम पर कथित रूप से कमीशनखोरी का खेल चलने का गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर मामूली ब्लड प्रेशर जांच के नाम पर कर्मचारियों को टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) और ब्रह्मानंद अस्पताल रेफर कर रहे हैं। इससे एक ओर जहां यूसिल को हर महीने लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी और कर्मचारी मानसिक, आर्थिक और समय की परेशानी झेलने को मजबूर हैं। कंपनी अस्पताल की कार्यप्रणाली से कर्मचारियों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है।

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यूसिल अस्पताल की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

नरवापहाड़ के संपदा विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई 2025 में ब्लड प्रेशर जांच के नाम पर उन्हें लगातार 15 दिनों तक टीएमएच का चक्कर लगाना पड़ा। टीएमएच में सभी रिपोर्ट सामान्य आई, इसके बावजूद इस अनावश्यक जांच में लगभग छह हजार रुपये खर्च हो गए। अधिकारी ने आशंका जताई कि संभवतः यूसिल अस्पताल की मशीन में ही तकनीकी खराबी थी, लेकिन इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। इस प्रक्रिया में उन्हें 15 दिनों की छुट्टी भी गंवानी पड़ी। बाद में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एम. के. रजक के हस्तक्षेप से उनका कंपनी योगदान संभव हो सका। अधिकारी का कहना है कि इस तरह की रेफरल प्रक्रिया से यूसिल को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।

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कर्मचारियों की शिकायतों से बढ़ी प्रबंधन की चिंता

अन्य कई यूसिल कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया कि फिटनेस जांच के नाम पर जादूगोड़ा अस्पताल के डॉक्टर बेवजह कर्मचारियों को टीएमएच या ब्रह्मानंद अस्पताल रेफर कर परेशान कर रहे हैं। उनका कहना है कि साधारण ब्लड प्रेशर जैसी जांच कंपनी अस्पताल में ही आसानी से हो सकती है, इसके बावजूद बाहरी अस्पताल भेजना संदेह पैदा करता है। पीड़ित कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग यूसिल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ. कंचन आनंद राव से की है, ताकि दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई हो और कंपनी को हो रहे आर्थिक नुकसान पर रोक लग सके। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि यूसिल प्रबंधन इस कथित गोरखधंधे पर लगाम लगाता है या फिर यह खेल आगे भी बदस्तूर जारी रहता है।

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