जमशेदपुर: जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने झारखंड विधानसभा में शून्यकाल के दौरान तेली समाज और प्रजापति समाज के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि तेली समाज का पारंपरिक पेशा घानी से तेल निकालना अब लगभग लुप्तप्राय हो गया है। अधिकांश लोग अब खेती पर निर्भर हैं और तेल व्यवसाय से आजीविका कठिन हो गई है।
विधायक ने सरकार से ‘तेल व्यवसाय घानी बोर्ड’ के गठन की मांग की। उनका कहना है कि बोर्ड बनने से तेली समाज को सरसों तेल व्यवसाय में लाइसेंस और सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से चल सकेगा। साथ ही, उन्होंने माटी कला बोर्ड को पुनः सक्रिय करने की मांग की ताकि प्रजापति समाज को भी लाभ मिल सके।
विधायक ने पंचायतों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे मजबूत इकाई हैं। पिछले कुछ वर्षों में पंचायतों को राशि का आवंटन नहीं मिलने से विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया कि राज्य वित्त आयोग की राशि जल्द पंचायतों को जारी की जाए, ताकि गांवों और पंचायतों का रुका हुआ विकास फिर पटरी पर लौट सके।
पूर्णिमा साहू ने कार्यकाल के दौरान जनप्रतिनिधियों की आकस्मिक मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजे की व्यवस्था करने की भी मांग रखी। साथ ही उन्होंने केरल मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड में मुखियागणों का मानदेय कम-से-कम 30 हजार रुपये होना चाहिए।
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