पोटका: हाल में झारखंड सरकार ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी का नाम बदल दिया है। जिसको लेकर महान साहित्यकार सुनील कुमार दे ने कहां की जो सरकार का एक दुर्भाग्यपूर्ण कदम है। जिसका राज्यभर में विरोध हो रहा है। जो जायज भी है। किसी एक बिभूति को सम्मान देने के लिए दूसरे एक बिभूति को अपमान करना अनुचित और निंदनीय है। बल्कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक राष्ट्रवादी नेता थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक स्वाधीनता संग्रामी, एक शिक्षाविद,एक चिंतक और एक राजनैतिक पार्टी का संस्थापक भी थे।
नाम बदलने का कदम समझ से परे
जो लोग उनके नाम पर यूनिवर्सिटी का नाम रखा था वे लोग मूर्ख नहीं थे। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान बिभूति को सम्मान देने के लिए उनके नाम पर यूनिवर्सिटी का नाम रखा था। अचानक यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का कदम समझ से परे है। अनेक लोगों के मन में प्रश्न उठ रहा है क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक बंगाली थे बोलके उनका नाम हटाया गया है, क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक राष्ट्रवादी राजनैतिक पार्टी के संस्थापक थे। एक बिभूति का अपमान होने पर लोग जरूर प्रश्न करेंगे और विरोध भी करेंगे चाहे जो भी समुदाय का हो।
पूर्ववत रखने का कृपा की जाय
मेरा सरकार से सुझाव है कि बिभूति का सम्मान राज्य में जरूर होना चाहिए लेकिन इसके लिए दूसरे बिभूति का अपमान हो यह कदापि ठीक नहीं है।आप जिसको सम्मान देना चाहते हैं उनके नाम पर नया स्कूल,कॉलेज, यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल, खेल का मैदान खोले कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जिस बिभूति के सम्मान में जो चीज खुला हुआ है उसको बदलने का काम नहीं होना चाहिए।इसलिए एक झारखंडवासी होने के नाते झारखंड सरकार से मेरा नम्र निवेदन है कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी का नाम पूर्ववत रखने का कृपा की जाय जिसके पीछे जन भावनाएं जुड़ी हुई है।
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