जमशेदपुर : भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पूर्वी सिंहभूम जिले में कराए जा रहे एसआईआर में कई विसंगतियां सामने आ रही हैं. पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने के कारण यहां के आदिवासी-मूलवासी खासे परेशान हैं. उन्हें डर सता रहा है कि कहीं उनका नाम मतदाता सूची से काट नहीं दिया जाय. ताजा मामला पोटका विधानसभा क्षेत्र के तालसा ग्रामसभा के केरूवाडूंगरी पंचायत में सामने आया है. पंचायत के 1000 से ज्यादा मतदाताओं को मतदाता सूची की विसंगतियां दूर करने का नोटिस भेजा गया है.
नोटिस मिलने के बाद पूरे पंचायत में खलबली मच गई है. इस मामले को लेकर सोमवार को तालसा ग्रामसभा की अगुवाई में मांझी बाबा सह ग्राम प्रधान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी सुमित कुमार व अंचलाधिकारी मनोज कुमार से भेंट की. इस दौरान उन्हें मांग पत्र सौंपकर एसआईआर के दौरान हो रही परेशानियों से अवगत कराया. मांझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने बताया कि पोटका विधानसभा क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है.

यहां पेसा अधिनियम लागू है. अधिकांश ग्रामीणों के पास भारत निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. जिसके कारण एसआईआर में उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि पेसा अधिनियम के तहत ग्रामसभा को मान्यता दी गई है. ऐसे में ग्राम प्रधान, मांझी बाबा एवं अन्य पारंपरिक प्रधान को एसआईआर के दस्तावेज सत्यापन का अधिकार दिया जाय. जिससे यहां के खूंटकाटी रैयत अपने लोकतांत्रित अधिकार से वंचित नहीं हों.
इसी तरह की मांग ग्राम ग्राम सभा के महासचिव भागवत मार्डी तथा सचिव जितेन हेंब्रम ने भी की. दोनों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग इन दिनों खेती-बाड़ी में व्यस्त रहते हैं. समय निकालकर वे एसआईआर के लिए सरकारी कार्यालय पहुंच रहे हैं. लेकिन वहां उनसे अलग-अलग दस्तावेज की मांग की जा रही है. दोनों ने ग्राम सभा को सर्वोपरि बताया तथा स्थानीय निवास व वंशावली जारी करने का अधिकार देने की मांग की.

कहा कि ऐसा नहीं होने पर ग्रामसभा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को विवश होगी. वहीं पंचायत के मुखिया कान्हु मुर्मू ने बताया कि उनके पंचायत के सैकड़ो मतदाताओं को एसआईआर का नोटिस भेजा गया है. उन्होंने इस प्रक्रिया का स्वागत किया. लेकिन कहा कि इस प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत है. जिससे स्थानीय निवासी अपने लोकतात्रित अधिकार से वंचित नहीं हो जाएं. अन्यथा अवैधानिक मतदाताओं को हटाने के चक्कर में मूलवासी-खूंटकाटी रैयत वंचित नहीं हो जायं.
मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, पोटका विधानसभा के विधायक, झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं सहायक निर्वाचन पदाधिकारी को भी भेजी गई.
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