पुराने मित्रों की यादें जीवन का अनमोल खजाना हैं : राजेन्द्र सिंधिया
गुवा : किरीबुरू हिलटॉप ओड़िया स्कूल का स्वर्ण जयंती समापन समारोह एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जहां सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि पीढ़ियों का मिलन, भावनाओं का विस्फोट और यादों का सैलाब देखने को मिला। यह समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि पुराने रिश्तों को फिर से जीने और संजोने का अवसर बन गया। समापन समारोह में किरीबुरू खदान के सीजीएम माइंस प्रशान्त मनोहर राव शिरपुरकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन के दौरान वे भावुक हो उठे और स्कूल के दिनों की यादों में खो गए। उन्होंने कहा, स्वर्ण जयंती तो सिर्फ एक बहाना है, असल में यह पुराने दोस्तों से मिलने का जरिया है।
जब हम मिलते हैं, तो गले लगकर रो पड़ते है, यही असली खुशी है। उन्होंने एलुमनी को संदेश दिया कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहने चाहिए, सिर्फ जयंती के नाम पर नहीं बल्कि एलुमनी मिलन के रूप में। सीजीएम शिरपुरकर ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर सभी को एक जगह लाना आसान नहीं है। इसके पीछे महीनों की मेहनत और समर्पण छिपा है। आज हर एलुमनी के चेहरे पर जो खुशी है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। कार्यक्रम की शुरुआत में जीएम इलेक्ट्रिकल नवीन सोनकुसरे एवं सिविल विभाग के एजीएम प्रशांत पांडा ने स्वर्ण जयंती स्मारिका (पुस्तक) का विमोचन किया।

इस दौरान देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का विशेष संदेश भी पढ़कर सुनाया गया, जिसने समारोह की गरिमा को और ऊंचा कर दिया। विद्यालय के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंधिया ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि सुदीप दास का स्वागत और धन्यवाद किया। विद्यालय के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंधिया ने कहा कि पुराने मित्रों की यादें जीवन का अनमोल खजाना हैं, जो समय की धूल जमने के बाद भी दिल के किसी कोने में चमकती रहती हैं। वे बचपन की मासूमियत, कॉलेज की मस्ती और संघर्ष के दिनों का साझा आईना हैं, जो हमें बताते हैं कि हम कहाँ से आए हैं। ये यादें, चाहे कितनी भी पुरानी हों, चेहरे पर मुस्कान और मन में सुकून लाती हैं। साथ ही आयोजन समिति, एलुमनी टीम तथा देश-विदेश से जुड़े सभी पूर्व छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, जो लोग यहां नहीं आ सके, उन्होंने भी लाइव टेलीकास्ट के जरिए इस पल को जिया।
दो दिवसीय कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट किया गया, जिससे देश-विदेश में बसे सैकड़ों एलुमनी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। ऑनलाइन जुड़े लोगों के कमेंट्स में एक ही भावना झलक रही थी काश हम भी वहां मौजूद होते यह तकनीक और भावनाओं का अद्भुत संगम था। समारोह का सबसे जीवंत हिस्सा कटक से आए रियल कलाकार ऑर्केस्ट्रा टीम का रंगारंग कार्यक्रम रहाबिहारी गानों पर पुराने छात्र-छात्राएं, आयोजन समिति के सदस्य और स्थानीय लोग जमकर थिरके। ऐसा लग रहा था मानो समय थम गया हो और हर कोई अपने सुनहरे अतीत को फिर से जी रहा हो।
कार्यक्रम रात करीब एक बजे तक चलता रहा, जहां हर पल उत्साह, संगीत और अपनापन छलकता रहा।


















































