विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर झाड़ग्राम स्थित साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य पौधारोपण अभियान
झाड़ग्राम : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर झाड़ग्राम स्थित साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प के साथ आयोजित इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर में कुल 500 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण के निर्माण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 184वीं बटालियन के कमांडेंट प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रदीपा घोष, सीआरपीएफ के अधिकारी एवं जवान, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे और उत्साहपूर्वक पौधारोपण में भाग लिया।
कमांडेंट प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरे आज पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं। ऐसे समय में वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ वायु, जल संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले सीआरपीएफ पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का अभिन्न हिस्सा मानती है। जंगलों, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्य करने के कारण बल का प्रकृति से विशेष जुड़ाव है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और मजबूत होती है।
अभियान के दौरान नीम, पीपल, बरगद, आम और अशोक सहित विभिन्न छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लिया, ताकि आने वाले वर्षों में ये पौधे विकसित होकर पर्यावरण को अधिकतम लाभ पहुंचा सकें।
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान न केवल हरित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बनेगा। एक पेड़ अनेक जीवन के संदेश के साथ झाड़ग्राम ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
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