रांची: यूरिया खाद की कमी और लूट सहित विभिन्न जनमुद्दों को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और झारखंड राज्य किसान सभा ने शुक्रवार को सोनाहातु प्रखंड कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी को 15 सूत्री ज्ञापन सौंपा गया।
किसानों के सवाल और नारे
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए—
“आजादी के बाद सबसे ज्यादा यूरिया की कमी क्यों?”
“266 रुपए का यूरिया 600 में क्यों?”
“कोकरो और कांची नहर का पानी किसानों को दो”
“डायरिया प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाओ”
“स्मार्ट मीटर बंद करो”
“मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी दो”
साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार पर रोक, फसल नुकसान का मुआवजा, राशन-पेंशन की गारंटी, शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार और सोनाहातु में रेफरल अस्पताल निर्माण जैसी मांगें उठाईं।
मुख्य वक्ता माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य और किसान सभा के राज्य अध्यक्ष सुफल महतो ने कहा, “बीते 11 वर्षों में मोदी सरकार ने सबसे ज्यादा किसान विरोधी नीतियां लागू कीं। 2014 का भूमि अध्यादेश, 2020 के तीन काले कृषि कानून और 2024 की कृषि बाजार नीति ने किसानों को तबाह कर दिया।”
उन्होंने कहा कि यूरिया की किल्लत और महंगाई ने किसानों को आत्महत्या की कगार पर पहुँचा दिया है। MSP की कानूनी गारंटी पर अब तक अमल नहीं हुआ। “सरकार सिर्फ अडानी-अंबानी का विकास कर रही है, आम जनता तबाही झेल रही है।”
सुफल महतो ने कहा कि 13 महीने चले किसान आंदोलन और 750 किसानों की शहादत को देश कभी नहीं भूलेगा। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण और कॉरपोरेट लूट ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया है। उन्होंने झारखंड सरकार को भी चेतावनी दी कि वह युवाओं और किसानों से किए वादों पर अमल करे।
सभा ने तय किया कि आने वाले दिनों में झारखंड सहित देशभर के प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।
प्रदर्शन में माकपा जिला कमिटी सदस्य उमेश महतो, नौजवान सभा जिला अध्यक्ष विकास मुंडा, जिला किसान कौंसिल सदस्य घुरन पातर, दिनेश महतो, बसंत मुंडा, राजेंद्र मुंडा, हृदय नाथ मुंडा समेत बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए।
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