जमशेदपुर : शहर में इन दिनों यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने के उद्देश्य से ट्रैफिक पुलिस द्वारा जगह-जगह वाहन व हेलमेट की जांच की जा रही है. जांच के दौरान यातायात व्यवस्था कितना दुरूस्त हो पाया है, यह चर्चा का विषय हो सकता है. लेकिन जांच के दौरान जिस प्रकार ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चालकों के साथ व्यवहार किया जा रहा है. उसपर अब सवाल उठने लगे हैं. आपको बता दें कि जांच के क्रम में पुलिसिया कार्रवाई के कारण कई दुर्घटनाएं हुई हैं. जिसमें कई लोग जहां गंभीर रुप से घायल हुए हैं. वहीं कई लोगों की मौत भी हुई हैं. पुलिस की जांच की कार्यशैली को लेकर शहर की जनता अब मुखर हो गई है और पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है. इस संबंध में रडार न्यूज 24 ने समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से बातचीत की. आइए जानते हैं इस मुद्दे पर लोगों ने क्या कहा…
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जांच के दौरान अपराधियों जैसा होता है सलूक : विजय मुनका

सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विजय आनंद मुनका ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस के द्वारा शहर में किए जा रहे वाहन एवं हेलमेट चेकिंग के दौरान आम लोगों के साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जाता है. ट्रैफिक पुलिस अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है. उसे यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी है. लेकिन इस कार्य को भूलकर ट्रैफिक पुलिस केवल वाहन एवं हेलमेट जांच में व्यस्त है. जिसके कारण शहर में अक्सर जाम एवं दुर्घटनाएं हो रही है. उन्होंने कहा कि वे वाहन एवं हेलमेट जांच के विरोधी नहीं है. लेकिन जनता को परेशानी नहीं हो इसका भी ध्यान रखना भी ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेवारी है. ट्रैफिक पुलिस को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की जरूरत है.
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टैफिक पुलिस अपनी कार्यशैली मे लाए बदलाव : सरदार शैलेंद्र सिंह

सेंट्रल गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी के चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस को अपने कार्यशैली में बदलाव लाने की जरूरत है. आए दिन आम लोगों के साथ अपराधियो के जैसा व्यवहार किया जाना उचित नहीं है. ट्रैफिक पुलिस को चाहिए कि नए टेक्नालॉजी का सहारा लेकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करें. न कि नियम तोड़ने वालों को दौड़ाए तथा दुर्व्यवहार करें. उन्होंने कहा कि शहर में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं. जिसमें ट्रैफिक पुलिस की निमय के विपरीत कार्यशैली के कारण दुर्घटनाएं हुई हैं. जिसमें लोगों की जानें गई हैं.
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चोर की भांति छुपकर खड़ी रहती है पुलिस : मिथिलेश श्रीवास्तव

विश्व भोजपुरी विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह शिक्षाविद मिथिलेश श्रीवास्तव ने ट्रैफिक पुलिस के वाहन एवं हेलमेट जांच के तौर तरीकों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि चौक-चौराहों पर पुलिस छुपकर खड़ी रहती है. बिना हेलमेट पहने व्यक्ति के सम्मुख अचानक प्रकट हो जाती है. जिससे वाहन चालक अपना नियंत्रण खो देता है. ऐसी स्थिति में दुर्घटना होना स्वाभाविक है. कई घटनाएं इसकी गवाह हैं. ट्रैफिक पुलिस लोगों की सहुलियत, यातायात नियमों का पालन कराने के लिए है. लेकिन यहां पुलिस सड़क पर जजमेंट करने लगती है. ट्रैफिक पुलिस को इस तरह की कार्यशैली से बचना चाहिए.
पुलिस के प्रति आमजन में पनप रहा नकारात्मक भाव : दीपक कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता सह वरिष्ठ पत्रकार दीपक कुमार ने वाहन एवं हेलमेट चेकिंग के तौर तरीके पर कई सवाल खड़े किए. कहा, अच्छाई की आड़ में बुराई पनप रही है. पुलिस की कार्यशैली को लेकर आमजन मानस में पुलिस के प्रति नकारात्मक भाव पनप रहा है. कहा जिस अंदाज में पुलिस द्वारा आम वाहन चालकों को सड़क पर छुपकर, अचानक धमककर, दौड़ाकर वाहन से जबरन चाबी निकालकर आजाद भारत में परेशान किया जा रहा है, वह कतई जायज नहीं है. कहा पूर्व में एसएसपी ने पुलिस कर्मियों को शख्त हिदायत दिया था कि छुपकर अथवा दौड़ाकर किसी को न पकड़ा जाए और न ही किसी वाहन चालक के वाहन से जबरन चाबी निकाला जाए. ऐसे व्यवहार से दुर्घटना की प्रबल संभावना है. वहीं जब कोई शख्स प्रतिरोध करता है तो पुलिस अपने बचाव में सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं को हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं. क्या हम ऐसे व्यवहार से सुंदर और आदर्श समाज गढ़ने की परिकल्पना कर सकते हैं ? कई बड़े न्यायाधीशों ने भी ऐसी घटनाओं पर आपत्तियां दर्ज की है. परंतु हालात नहीं बदल रहे हैं. आमजनों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है. आए दिन पुलिस की इस कार्यशैली को लेकर वाहन चालकों से तू-तू-मैं-मैं आम बात हो गई है. उन्होंने कहा बेशक हेलमेट पहनना चाहिए. इससे सुरक्षा का भाव झलकता है. परंतु नियम को हथियार बनाने के बजाए उसकी आड़ में अपने ही देशवासियों के साथ जिस तरह का व्यवहार आजाद मुल्क में किया जा रहा है वो सभ्य समाज में शोभा नहीं देता है.
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