रामगढ़: कुपोषण निवारण और एनीमिया में कमी लाने हेतु रणनीतिक कार्यक्रम “समर/CMAM” के अंतर्गत समाहरणालय सभाकक्ष, रामगढ़ में दो दिवसीय जिलास्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसका उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी इंदु प्रभा खलखो द्वारा किया गया.
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम गंभीर कुपोषित बच्चों (SAM/MAM) की पहचान और प्रबंधन हेतु एक महत्त्वाकांक्षी पहल है, जिसे समुदाय स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा. वर्ष 2022-23 से यह कार्यक्रम राज्य के 12 जिलों में पहले से लागू है, अब इसे शेष जिलों में भी विस्तारित किया जा रहा है, जिनमें रामगढ़ भी शामिल है.
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
प्रशिक्षण के दौरान समर कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियों को विस्तार से बताया गया. इनमें शामिल हैं:
6 माह से 59 माह तक के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान और प्रबंधन.
जन्म से 6 माह के बच्चों में कुपोषण के जोखिम की पहचान.
6 माह से 59 माह तक के मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान.
समर कार्यक्रम के अंतर्गत अनुश्रवण और मूल्यांकन की प्रक्रिया.
चिकित्सीय और समुदाय आधारित प्रबंधन
बिना चिकित्सीय जटिलता वाले अति गंभीर कुपोषित बच्चों का प्रबंधन समुदाय स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से किया जाएगा. जबकि गंभीर चिकित्सीय स्थितियों या भूख की कमी वाले बच्चों को कुपोषण उपचार केंद्रों (MTC) में रेफर किया जाएगा.
गंभीर कुपोषित बच्चों की देखरेख के 11 चरण
समर कार्यक्रम अंतर्गत 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की देखभाल 11 चरणों में की जाएगी:
सामुदायिक सहभागिता
विकास की निगरानी और जांच
भूख परीक्षण
चिकित्सीय मूल्यांकन
देखभाल के लिए निर्णय
पोषण प्रबंधन
चिकित्सीय हस्तक्षेप
पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता संबंधी शिक्षा
आंगनवाड़ी केंद्रों पर अनुवर्ती देखभाल
ठीक होने या 4 माह पूर्ण होने पर डिस्चार्ज
मासिक फॉलो-अप (VHSND के माध्यम से)
प्रशिक्षण में अधिकारियों की सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी सीडीपीओ, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और महिला पर्यवेक्षिकाएं उपस्थित थीं. प्रशिक्षण सत्र का संचालन अनिमा नीलम भेंगरा, रेणुका कुमारी, ज्योति कुमारी, विजयलक्ष्मी और आशुतोष कुमार (झारखंड राज्य पोषण मिशन के प्रतिनिधि) द्वारा किया गया.
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