Gua : जब सुरों में बसती थी दोस्ती, हारमोनियम और बहेलिया पर गूंजती थी पहचान..

40 वर्षों बाद मिले दो दोस्त, भावुक पल का गवाह बना ओडिया स्कूल

गुवा : करीब 50 वर्ष पहले, जब किरीबुरू आज जैसा विकसित नहीं था, तब ओडिया स्कूल भी अपने शुरुआती संघर्ष के दौर से गुजर रहा था। उन दिनों स्कूल के हर कार्यक्रम की जान हुआ करते थे दो दोस्त शत्रुघ्न प्रधान और रामचंद्र बिहारी। एक हारमोनियम संभालते, तो दूसरा बहेलिया (वाद्य यंत्र)। चाहे स्कूल का सांस्कृतिक कार्यक्रम हो या आसपास का कोई आयोजन—इन दोनों की जोड़ी लोगों के दिलों पर राज करती थी। उनकी दोस्ती सिर्फ मंच तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन के हर संघर्ष में साथ निभाने वाली थी। आज जिस ओड़िया स्कूल पर सभी गर्व करते हैं, वह कभी संघर्षों की बुनियाद पर खड़ा हुआ था। शत्रुघ्न प्रधान उन लोगों में थे जिन्होंने घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया, बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया, संसाधनों की कमी के बीच शिक्षा की लौ जलाए रखी।

जब गुरुजी श्री प्रधान वर्षों बाद उसी स्कूल की मिट्टी पर कदम रखे, तो हर याद चलचित्र की तरह आंखों के सामने घूम गई। उनकी आंखें नम हो गईं—क्योंकि यह सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा था। संकोच, दूरी और फिर अचानक मिलन हुई। बेटे की जुबान से पहले ही दोस्त को पहचान गए प्रधान सर। वर्तमान में सेल खदान में कार्यरत आदित्य बिहारी, जो पूर्व सेल कर्मी रामचंद्र बिहारी के पुत्र हैं, अपने पिता के पुराने मित्र प्रधान सर से मिलना चाहते थे। लेकिन उनके मन में एक संकोच था— “क्या सर को मेरे पिता याद होंगे?” वर्षों की दूरी, बदलता समय और जीवन की व्यस्तता—इन सबने इस सवाल को और गहरा कर दिया। लेकिन जैसे ही परिचय हुआ,

प्रधान सर ने बिना किसी झिझक के खुद ही अपने पुराने दोस्त रामचंद्र बिहारी का नाम लिया। वह पल जैसे समय को थाम लेने वाला था। जब गले मिले दो युग मंच पर बिखर गईं यादें, रो पड़ा हर देखने वाला जैसे ही दोनों दोस्त आमने-सामने आए, न कोई शब्द था, न कोई औपचारिकता—बस एक गहरा आलिंगन और आंखों से बहते आंसू । 40 साल की दूरी, अनगिनत यादें एवं अधूरी बातें शामिल है। सब कुछ उस एक पल में समा गया। मंच पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। यह सिर्फ दो दोस्तों का मिलन नहीं था, बल्कि उस दौर की वापसी थी, जहां रिश्ते सच्चे और गहरे हुआ करते थे।“जवानी साथ गुजरी, अब वक्त की दहलीज पर खड़े हैं”

भावुक शब्दों ने छू लिया हर दिल

दोनों दोस्तों ने भावुक होकर कहा—“जवानी में हम साथ थे, आज उम्र के उस मोड़ पर खड़े हैं जहां कल क्या होगा, कोई नहीं जानता। शायद अगर यह मंच नहीं मिलता, तो हम फिर कभी नहीं मिल पाते।” उन्होंने आयोजन समिति का आभार जताया, जिन्होंने इस अनमोल मिलन को संभव बनाया।आयोजन समिति का सफल प्रयास एक मंच ने मिलाए बिछड़े रिश्ते

 आयोजन समिति का अहम योगदान

प्रमुख रूप से राजेंद्र सिंधिया, रमाकांत परीडा, अरुण कुमार राउत राय,राजेश कुमार बेहेरा,अभिमन्यु सेठी,बीरेंद्र, संतोष कुमार पंडा सहित अन्य सदस्यों ने इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाया। आयोजन समिति के सदस्यों ने भी कहा—“हमारा प्रयास सिर्फ कार्यक्रम करना नहीं था, बल्कि उन रिश्तों को फिर से जोड़ना था जो समय के साथ बिछड़ गए थे। आज वह प्रयास सफल हुआ।”

इसे भी पढ़ें : Gua : गोलियों की गूंज से दहला कोल्हान, रूटागुटू के घने जंगल में सुरक्षाबलों की नक्सलियों से मुठभेड़


There is no ads to display, Please add some
Spread the love

Related Posts

Jamshedpur : अग्रसेन जयंती सप्ताह के अवसर पर अग्रवाल युवा मंच ने इस्कॉन मंदिर में किया राशन दान

जमशेदपुर : अग्रवाल युवा मंच, जमशेदपुर द्वारा पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन के तत्वावधान में आयोजित अग्रसेन जयंती सप्ताह के पावन अवसर पर शनिवार को इस्कॉन मंदिर, जमशेदपुर में राशन…

Spread the love

Jamshedpur :  कन्हैया सिंह की पत्नी ने पुलिस पर लगाया पति को झूठे केस में फंसाने का आरोप

कहा- विरोधियों की शह व पैसे लेकर तीन दिनों बात फर्जी आर्म्स बरामदी दिखायी जमशेदपुर : गैंगस्टर अखिलेश सिंह के सहयोगी कन्हैया सिंह की पत्नी शुष्मा सिंह ने पुलिस पर…

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share this Page

Slide-In Box help you to share the page on the perfect time