वेदों के लौकिक और आध्यात्मिक अधिकार की वापसी की वकालत करते थे दयानंद : डी.के पाणिनि
गुवा : डीएवी स्कूल की स्थापना दिवस डीएवी चिड़िया में मनाई गई ।प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल, चिरिया के डी.के पाणिनि ने हार्दिक उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि एक जून 1886 को लाहौर में यह डीएवी स्कूल शुरू किया गया था। यह देश का पहला डीएवी स्कूल है। महात्मा हंस राज इसी के हेडमास्टर थे। भारत की आजादी के कई क्रांतिकारी इसी स्कूल से पढ़े और इसमें शहीद भगत सिंह भी शामिल हैं।प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल, चिरिया के डी.के पाणिनि ने बताया कि वेदों की ओर लौटें, स्वामी दयानंद सरस्वती के ये कालजयी शब्द सबों के मार्ग को रौशन करते हैं । डीएवी आंदोलन की गौरवशाली विरासत का जश्न पूरे देश में मनाई जाती हैं। डीएवी स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने के पूरे डीएवी परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं दी है।
उन्होंने बताया कि स्वामी दयानद एक हिंदू तपस्वी और समाज सुधारक थे । जिन्होंने आर्य समाज (आर्यों का समाज की स्थापना (1875) की थी। वे आर्य समाज के एक हिंदू सुधारवादी आंदोलनकारी थे। वे वेदों के लौकिक और आध्यात्मिक अधिकार की वापसी की वकालत करते थे।
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