जमशेदपुर: करीम सिटी कॉलेज की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘स्पार्क’ ने गुगल मीट के माध्यम से समकालीन उर्दू कविता का प्रतिबिम्बन प्रस्तुत किया. इस आयोजन का नाम ‘आईना-ए-शब’ था, जो उर्दू शायरी की एक शानदार शाम बनकर उभरा. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार के प्रसिद्ध शायर ऐन ताबिश ने की.

शायरों का संगम
इस मुशायरे में देशभर के प्रसिद्ध उर्दू शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा. आलम खुर्शीद (अलीगढ़), तारा इकबाल (रायबरेली), सदफ़ इक़बाल (पटना), सैयद शीबान कादरी (अमरोहा), नाहिद कयानी (इंग्लैंड), और गौहर अजीज (जमशेदपुर) सहित कई अन्य बड़े नाम शामिल हुए. कार्यक्रम में करीम सिटी कॉलेज के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे, जो उर्दू शायरी के इस आयोजन का हिस्सा बने.
प्रधानाचार्य का स्वागत संदेश
करीम सिटी कॉलेज के प्रधानाचार्य ने इस मौके पर शायरों का स्वागत करते हुए कहा, “हम इस प्रकार के मुशायरे इसलिए आयोजित करते हैं ताकि हमारे विद्यार्थियों और समाज के लोगों का रुझान साहित्य और उर्दू शायरी की ओर बढ़े. आज भी उर्दू शायरी की आवश्यकता उतनी ही है जितनी पहले थी.”
शायरी का अद्भुत संगम
स्पार्क के आयोजक डॉ. एस एम यहिया इब्राहीम ने कार्यक्रम का संचालन किया. मुशायरे की शुरुआत में मेज़बान शायर गौहर अजीज ने अपनी गज़लें प्रस्तुत की. इसके बाद बारी-बारी से सभी शायरों ने अपनी विशेष रचनाओं से कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया. आलम खुर्शीद का यह शेर विशेष रूप से पसंद किया गया:
“दुनिया की भाग दौड़ में हासिल नहीं है कुछ
हासिल हर एक चीज है, हासिल नहीं है वो.”
अध्यक्ष ऐन ताबिश ने अपनी अध्यक्षीय रचना प्रस्तुत की, जो सभी को प्रभावित कर गई:
“फिर देखना उजड़े हुए मंजर के तमाशे
फिर सोचना क्या क्या न हुआ होने से पहले.”
समापन और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में कन्वीनर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया. इस ऑनलाइन मुशायरे में देशभर से 50 से अधिक लोग शामिल हुए और भारत से लेकर इंग्लैंड तक की शायरी का लुत्फ उठाया.
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