- विकास एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की पहल, देशज भाषाओं के साहित्यकार एक मंच पर
- “प्रभाती” पत्रिका: आंचलिक साहित्य की नई पहचान
पोटका : विकास एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में 25 दिसम्बर को मुक्तेश्वर धाम, हरिणा आश्रम परिसर में एक भव्य बहुभाषीय साहित्यिक सम्मेलन सह पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भुवनेश्वर, पश्चिम बंगाल एवं झारखंड से आए प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि और बुद्धिजीवी अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान बहुभाषीय कवि सम्मेलन, साहित्यिक विमर्श और समसामयिक साहित्य पर सार्थक चर्चा आयोजित की गई। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के साहित्यकारों को एक मंच पर लाकर आपसी संवाद को सशक्त बनाना रहा। साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति से पूरा परिसर रचनात्मक ऊर्जा और वैचारिक संवाद से सराबोर नजर आया।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बहुभाषीय साहित्यिक प्रयासों की बढ़ती भूमिका
इस अवसर पर बहुभाषी पत्रिका “प्रभाती” के प्रवेशांक का ससम्मान विमोचन किया गया। बहुभाषीय पत्रिका के प्रभारी संपादक रबि कान्त भकत ने बांग्ला, हिंदी, अंग्रेज़ी और संथाली के सुप्रसिद्ध लेखक, अनुवादक एवं पूर्व विधायक माननीय श्री सूर्य सिंह बेसरा को पत्रिका की प्रति भेंट की। “प्रभाती” को एक नई सुबह की पहली किरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो आंचलिक लेखक-लेखिकाओं के विचारों, संवेदनाओं और स्थानीय सरोकारों का जीवंत दस्तावेज है। इस प्रवेशांक में झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के 62 आंचलिक रचनाकारों की 15 कहानियाँ, 47 कविताएँ, 7 लोक-संगीत रचनाएँ तथा 7 विचारात्मक लेख शामिल हैं, जो हिंदी, बांग्ला, ओड़िया, अंग्रेज़ी, संथाली, कुड़माली एवं संस्कृत भाषाओं में रचित हैं। यह प्रकाशन पूर्णतः सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है और भविष्य में भी इसी सहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा।