- चार माह से आंगनवाड़ियों में पोषाहार बंद, सेविकाओं और सहायिकाओं का मानदेय भी रुका
- केंद्रीय श्रम कानून लागू करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी, बच्चों के पोषण पर संकट
जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश नेता सह झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग 75 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, धात्री और छह माह से तीन वर्ष तक के लगभग 30 लाख बच्चों को मिलने वाला राशन पिछले चार से पाँच माह से बंद है। इस कारण गरीब और वंचित बच्चों का शोषण लगातार जारी है। ठंड के मौसम में छोटे बच्चों के भूखे रहने की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पांडेय ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत सेविका और सहायिकाएं भी राज्य सरकार की लापरवाही का शिकार हैं। कई जिलों में उनका मानदेय तीन माह से बंद है। स्कूली बच्चों को मिलने वाला पोषाहार भी चार माह से बंद पड़ा है। समय पर मोबाइल रिचार्ज, मकान भाड़ा और सीबीई की राशि नहीं मिलने से सेविकाएं भारी दबाव में हैं। कई केंद्रों पर सेविकाएं उधार राशन खरीदकर बच्चों को भोजन करा रही हैं, लेकिन दुकानदारों को समय पर भुगतान नहीं होने से सामाजिक दबाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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आंगनवाड़ी केंद्रों पर विवाद, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पांडेय ने कहा कि कई आंगनवाड़ी केंद्रों पर गार्जियन और सेविकाओं के बीच कहासुनी और मारपीट तक की नौबत आ चुकी है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं का शोषण पिछले 50 वर्षों से जारी है। राज्य सरकार ने अब तक उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया है। पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों में संशोधन कर 27 कानूनों को रद्द कर मात्र चार श्रम कानून लागू किए हैं। इसमें घोषणा की गई है कि 1 जनवरी 2026 से अकुशल मजदूरों को एक दिन का वेतन 937 रुपये मिलेगा। कई राज्य सरकारें इस कानून को लागू कर रही हैं, लेकिन झारखंड सरकार अब तक मौन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जब अपने मानदेय पर कार्यरत महिलाओं को राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दे सकती, तो नई नियुक्तियों का दिखावा कर रही है।
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श्रम कानून लागू करने में झारखंड सरकार की उदासीनता, आंदोलन की चेतावनी
पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते राज्य सरकार केंद्रीय श्रम कानूनों को लागू कर आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को राज्यकर्मी का दर्जा नहीं देती, तो राज्य के लगभग 1.5 लाख सेविका और सहायिकाएं सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगी। उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त राज्य बनाकर ही झारखंड को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है। यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार पर होगी।
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