देवघर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संतों के बीच खेमेबाजी की स्थिति उत्पन्न हो गई है. यह बयान गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने देवघर में दिया. उन्होंने कहा कि आजकल देश में संतों की पहचान भाजपाई संत, सपाई संत और बसपाई संत जैसी हो गई है, जो एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. शंकराचार्य ने कहा कि आजकल संत भी प्रधानमंत्री के अनुगमन में चलने लगे हैं, जो धर्म और आध्यात्मिकता की असल भावना के खिलाफ है.
हिंदू राष्ट्र बनाने में कोई बाधा नहीं – शंकराचार्य
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हुए कहा कि इस दिशा में कोई भी बाधा नहीं है. उन्होंने बताया कि देश के सभी पूर्वज सनातनी हिंदू थे और अगर हम सनातन सिद्धांतों का पालन करें, तो हिंदू राष्ट्र की दिशा में किसी भी प्रकार का विरोध नहीं होगा. शास्त्रों का सही तरीके से पालन करने से सभी समस्याएं हल हो सकती हैं.
बैद्यनाथ मंदिर मामले में सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं
बैद्यनाथ मंदिर से जुड़े धार्मिक मामले में शंकराचार्य ने कहा कि राज्य सरकार को धार्मिक और आध्यात्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रों के अनुसार, धार्मिक क्रियाएं और विधियां शास्त्र सम्मत तरीके से ही होनी चाहिए. इस संदर्भ में उन्होंने स्कंद पुराण का उदाहरण दिया, जिसमें यह कहा गया है कि अगर देवी-देवता की प्रतिमा विधिवत प्रतिष्ठित नहीं हुई है, तो उनका सन्निवेश नहीं होता.
राष्ट्र रक्षा शिविर में शंकराचार्य का संबोधन
शंकराचार्य ने मैहर गार्डेन में आयोजित तीन दिवसीय साधना और राष्ट्र रक्षा शिविर को संबोधित किया. इस शिविर में हिंदू धर्म की रक्षा, देश की अखंडता और सुरक्षा पर चर्चा की गई. शिविर के पहले सत्र में साधना की गई, जबकि दूसरे सत्र में राष्ट्र रक्षा के उपायों पर शंकराचार्य ने विस्तार से बात की.
देश भर से जुटे अनुयायी और शिष्य
इस शिविर में पूरे देश से शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के अनुयायी और शिष्य शामिल हुए. हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, बिहार-झारखंड और बंगाल सहित अन्य राज्यों से भक्तों ने इसमें भाग लिया.
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