जमशेदपुर: न्यू ग्रीन सिटी, बालगुमा निवासी सुभाष कुमार शाही ने पूर्वी सिंहभूम जिला खनन विभाग के जन सूचना पदाधिकारी से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत कई महत्वपूर्ण वैधानिक सूचनाएं मांगी हैं. उनकी मांगें खनिज नियमों के दायरे में संचालित गतिविधियों की वैधता को लेकर हैं.
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क्या है मांगी गई जानकारी का कानूनी आधार?
सुभाष कुमार शाही ने जानकारी मांगी है कि—
- MM(DR) Act, 1957 के तहत non-mineralized area में किन खनिजों का उत्खनन निजी या सार्वजनिक भूमि पर किया जा सकता है?
- वे खनिज कौन-से हैं जिनका खनन राज्य सरकार को बिना केंद्र की अनुमति के नियमित करना प्रतिबंधित है?
- ‘Minerals vest in government’ किस प्रकार के खनिजों पर लागू होता है?
- किस स्थिति में खनिज निजी स्वामित्व की भूमि में आते हैं और MMDR Amendment Act, 1972 में संसद द्वारा इस पर क्या कहा गया है?
- Jharkhand Minor Mineral Concession Rules, 2004 के नियम 3 के अनुसार, कौन-से खनिज ऐसे हैं जिनके उत्खनन के लिए माइनिंग लीज अनिवार्य है, अन्यथा उसे अवैध खनन माना जाएगा?
क्रेशर उद्योग के संचालन पर वैधानिक संदेह
सुभाष शाही ने बताया कि उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि इमारती पत्थर को गिट्टी में परिवर्तित करने वाले क्रेशर उद्योग का संचालन बिना डीलर अनुज्ञप्ति के झारखंड लघु खनिज नियमावली, 2017 के तहत अवैध है. इस पर उन्होंने नियमावली का अध्ययन किया और पाया कि नियमों में कहीं स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि क्रेशर संचालन के लिए डीलर अनुज्ञप्ति आवश्यक है.
इसलिए उन्होंने RTI के माध्यम से मांगा है—
संबंधित नियम का सटीक उल्लेख
डीलर अनुज्ञप्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया
किस प्रपत्र में यह अनुज्ञप्ति जारी होती है?
क्या सभी खनिज सरकारी संपत्ति हैं?
शाही ने सर्वोच्च न्यायालय के नौ सदस्यीय संविधान पीठ के उस निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें स्पष्ट किया गया है कि—
सभी खनिज सरकारी संपत्ति नहीं होते
रॉयल्टी की मांग केवल उसी संस्था या व्यक्ति द्वारा की जा सकती है जिसके पास खनिज का स्वामित्व है
रॉयल्टी सिर्फ run of mine या लीज़ क्षेत्र में परिशोधित खनिज पर लागू होती है
ग्राम सभा को क्या अधिकार दिए गए हैं?
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि झारखंड सरकार ने PESA Rules, 2022 को अधिसूचित किया है, जिसके तहत ग्राम सभा को लघु खनिजों के प्रबंधन एवं रॉयल्टी वसूली का पूर्ण अधिकार प्राप्त है.
अधूरी सुनवाई और लंबित सवाल
शाही ने बताया कि झारखंड खनिज (अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भंडारण की रोकथाम) नियमावली, 2017 के तहत उनके विरुद्ध जारी मांग को उन्होंने उपायुक्त न्यायालय में चुनौती दी है, परंतु सुनवाई अब तक लंबित है.
उन्होंने दोबारा निवेदन किया है कि स्पष्ट किया जाए:
क्या इमारती पत्थर को क्रश करने के लिए डीलर अनुज्ञप्ति आवश्यक है?
यदि हाँ, तो किस नियम और प्रक्रिया के अंतर्गत?
यदि 30 दिनों में कोई उत्तर नहीं दिया जाता, तो यह माना जाएगा कि ऐसी कोई अनुज्ञप्ति या प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है.
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