जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित नार्वेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल के ऑडिटोरियम में ध्यान फाउंडेशन गोलोक चाकुलिया के तत्वावधान में तीन दिवसीय गौकृपा कथा का शुभारंभ हुआ. साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वतीजी ने व्यासपीठ से कथा सुनाकर उपस्थित जनसमूह को गौमाता के महत्व से अवगत कराया.
गौमाता के प्रति जागरूकता का आह्वान
साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी ने अपने व्याख्यान में कहा कि गौमाता केवल पशु नहीं, बल्कि वेदलक्षणा जगज्जननी हैं. उन्होंने कहा कि गौमाता के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को मिटाने और गौक्रांति लाने की आवश्यकता है. हिंदुत्व और भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए गौसेवा को जीवन का प्रमुख आधार बनाना होगा.
सनातन संस्कृति और गौमाता का महत्व
साध्वी दीदी ने कहा कि सनातन संस्कृति हमेशा गौ आधारित रही है. कृष्ण भगवान स्वयं गौमाता के उपासक थे. देव-असुर संग्राम में भी गौमाता की कृपा से देवताओं ने विजय पाई थी. गौमाता को कामधेनु का दर्जा प्राप्त है, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं.
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और पूजा-अर्चना
कार्यक्रम के मुख्य यजमान राजकुमार अग्रवाल ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन किया. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा सहित कई गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया.
कथा मंच की शोभा बढ़ाने वाले अतिथि
पूर्व विधायक दिनेशानंद गोस्वामी, सरदार काले सिंहजी, शिवशंकर सिंह, प्रादेशिक गौशाला संघ के महामंत्री अनिल मोदी, सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विजय आनंद मुनका सहित कई समाजसेवी और गौभक्त इस आयोजन में शामिल हुए.
देशभर से आए श्रद्धालु
कथा श्रवण के लिए कोलकाता, चाईबासा और अन्य स्थानों से श्रद्धालु आए थे. आयोजन का मंच संचालन प्रकाश चंडालिया ने किया.
श्रद्धालुओं का संदेश
साध्वी दीदी ने सभी श्रद्धालुओं को गौमाता की सेवा करने और उन्हें मात्र पशु न मानने की शिक्षा दी. उन्होंने कहा कि गौसेवा से न केवल समाज, बल्कि पूरा राष्ट्र समृद्ध हो सकता है. गौकृपा कथा के माध्यम से साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी ने गौमाता के प्रति सम्मान और सेवा की भावना को बढ़ाने का संदेश दिया. उन्होंने गौक्रांति की आवश्यकता पर बल देते हुए इसे भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया.
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