Jamshedpur : झारखंड में कंबल खरीद में निविदा की शर्तों का नहीं हुआ पालन, विधायक सरयू राय ने सीएम को पत्र लिखकर की जांच की मांग

कहा, हैंडलूम की बजाय पावरलूम से निर्मित हैं सारे कंबल

जमशेदपुर  : झारखंड में चालू वितीय वर्ष में कंबल आपूर्ति एवं वस्त्र वितरण में नियमों को पालन नहीं किया गया. आपूर्तिकर्ता ने नियमों के विपरीत निम्न गुणवत्ता के कंबल की आपूर्ति की. इसकी शिकायत मिलने पर विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस मामले की जांच कराने एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग की. मुख्यमंत्रई को लिखे पत्र में जमशेदपुर पूर्वी के जदयू विधायक ने कहा राज्य के सभी 24 जिलों में वितरण के लिए कुल कुल 9,20,245 (नौ लाख बीस हजार दो सौ पैंतालीस) कम्बल की आपूर्ति का आदेश ओम शक्ति टेक्सटाईल्स, पानीपत, हरियाणा और बिहारी लाल चौधरी ट्रेडलिंक प्राईवेट लिमिटेड, धनबाद को दिया गया है. विभिन्न जिलों में कम्बल की आपूर्ति की अंतिम तिथि 11 जनवरी, 2025 रखी गई थी. आपूर्ति का कार्य प्रारंभ हो गया है, परंतु पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न जिलों से कम्बलों की गुणवत्ता निविदा की शर्तों के अनुरूप नहीं होने की शिकायतें मिल रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से ग्रामीण क्षेत्रों में वितरीत किए जा रहे कंबलों का नमुना लेकर उसकी जांच कराने की मांग की.

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ऊन के धागे की बजाय सिंथेटिक धागे का किया इस्तेमाल

विधायक सरयू राय ने बताया कि निविदा शर्तों के अनुसार सभी कम्बल हैण्डलूम द्वारा निर्मित होने चाहिए. लेकिन  जो कम्बल वितरित किये जा रहे हैं, वे पावरलूम से निर्मित है. इसी तरह कम्बल में 70 प्रतिशत ऊन के धागे होना चाहिए और बाकि 30 प्रतिशत सिन्थेटिक धागा होना चाहिए. लेकिन जरूरतमंदों को वितरीत किया जा रहा कंबल इस कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं. अधिकांश कम्बलों में ऊन की मात्रा 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच होने की शिकायत मिल रही है. इसके साथ ही शेष सिन्थेटिक धागा पॉलिएस्टर का होना चाहिए और धागा नया होना चाहिए, परंतु वितरित किये जा रहे कम्बलों में पॉलिएस्टर का नहीं बल्कि पुराने कपड़ों का धागा लगाया गया है.

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वितीय प्रस्ताव के बाद हुआ तकनीकी मूल्यांकन

विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि वितरीत किया जा रहा कंबल धुलाई के बाद न्यूनतम दो किलोग्राम वजन की होना चाहिए, परन्तु इसमें भी कमी दिखाई पड़ रही हैं. उन्होंने कहा कि जेम पोर्टल पर प्रकाशित निविदा का मूल्यांकन भी सही तरीके से नहीं हुआ है. आमतौर पर पहले निविदा प्रस्ताव का तकनीकी मूल्यांकन होता है और जो निविदादाता तकनीकी मूल्यांकन की कसौटी पर खरा उतरते हैं, उनके वित्तीय प्रस्ताव का मूल्यांकन होता है, परन्तु प्रासंगिक निविदा निष्पादन के क्रम में पहले निविदादाताओं के वित्तीय प्रस्ताव का ही मूल्यांकन हो गया और बाद में इनकी तकनीकी प्रस्ताव का मूल्यांकन हुआ. विधायक ने कंबल की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए. साथ ही गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कंबल का मूल्य ज्यादा होने की बात कही. उन्होंने कहा कि ऐसी सूचना मिल रही है कि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दो तरह के कम्बलों की आपूर्ति की जा रही है. करीब 10 प्रतिशत कम्बल ऐसे हैं जो निविदा शर्तों के अनुरूप हैं, बाकि 90 प्रतिशत कम्बल निविदा के शर्तों के अनुरूप नहीं है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि जाँच की प्रक्रिया में इन्हीं 10 प्रतिशत कम्बलों के नमूने के आधार पर जांच की मांग की.

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