गुवा : सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों के सभी मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मेघाहातुबुरु सामुदायिक भवन स्थित ओपन थिएटर प्रांगण में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य मुद्दा सेल प्रबंधन द्वारा बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू करने की तैयारी रहा, जिसका सभी मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर विरोध किया। बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका विरोध बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से नहीं, बल्कि उसे लागू करने की प्रक्रिया से है। उनका कहना था कि जब तक Certifying Officer द्वारा नई उपस्थिति प्रणाली का प्रमाणन (Certification) नहीं किया जाता, तब तक इसे लागू करना श्रम कानूनों के विरुद्ध होगा।
नेताओं ने कहा कि सेवा शर्तों में किसी भी प्रकार का बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।उन्होंने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन नियमों की अनदेखी कर कर्मचारियों पर नई व्यवस्था थोपने का प्रयास कर रहा है, जो मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन है। संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यदि आज बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर सेवा शर्तों में बदलाव स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में कर्मचारियों के अन्य अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए इसे मजदूरों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा का विषय बताया गया। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस मामले को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन है।
ऐसे में अदालत का निर्णय आने तक प्रबंधन को कोई भी एकतरफा फैसला लागू नहीं करना चाहिए। नेताओं ने कहा कि न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, सभी यूनियन और कर्मचारी उसका सम्मान करेंगे, लेकिन उससे पहले किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि बिना Certifying Officer के प्रमाणन के बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का प्रयास किया गया तो किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया की चारों खदानों में एक साथ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को धरना-प्रदर्शन से आगे बढ़ाते हुए उत्पादन प्रभावित करने और खदान बंद कराने तक की रणनीति अपनाई जा सकती है। बैठक में सभी मजदूर संगठनों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संयुक्त मोर्चा का कहना था कि कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे वह प्रबंधन ही क्यों न हो। मजदूरों के अधिकारों को कुचलने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
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