रांची: झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक और भाजपा किसान मोर्चा के नेता जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि जिन राज्यों की सरकारें आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को न्यूनतम वेतनमान देने में टाल-मटोल कर रही हैं, वे कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही हैं। ऐसे मामलों में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय सचिवों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
पांडेय ने बताया कि गुजरात हाईकोर्ट, उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने आंगनवाड़ी सेविकाओं के न्यूनतम वेतन और ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया है। हाल ही में यूपी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य और केंद्र सरकार को फटकार लगाई। इससे मंत्रालयों में हड़कंप मच गया है।
देशभर में लगभग 28 लाख आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं। पांडेय का कहना है कि यह मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच चुका है और उन्हें विश्वास है कि 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले भारत विकास पखवाड़े के दौरान कोई स्थायी समाधान निकल सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें जल्द निर्णय नहीं लेतीं, तो 28 लाख आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका चक्का जाम आंदोलन करने को मजबूर होंगी। इससे देश में कुपोषण मुक्त भारत का अभियान भी प्रभावित होगा।
पांडेय ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाना है तो सबसे पहले महिलाओं को सशक्त बनाना होगा। आंगनवाड़ी सेविकाएं नवनिहालों की देखभाल और पोषण के लिए काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें आजादी के 75 साल बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है।
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