Jamshedpur: सारंडा को अभयारण्य घोषित करने में देरी दुर्भाग्यपूर्ण – सरयू राय

जमशेदपुर:  जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक और सारंडा संरक्षण अभियान के संयोजक सरयू राय ने झारखंड सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 858.18 वर्ग किलोमीटर में फैले सारंडा सघन वन के 575.19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य और 136.03 वर्ग किलोमीटर को कंजर्वेशन रिज़र्व घोषित करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश अब तक लागू न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सरयू राय ने कहा कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के बजाय सतह के नीचे स्थित लौह-अयस्क के खनन को प्राथमिकता दे रही है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट निर्देश है कि खनन और पर्यावरण संरक्षण के बीच टकराव की स्थिति में प्राथमिकता संरक्षण को दी जानी चाहिए।

राय ने आश्चर्य जताया कि सरकार के विधिक सलाहकार और खान, उद्योग व वन विभाग के अधिकारी क्यों सही सलाह नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि वे 2003-04 से सारंडा क्षेत्र में अविवेकपूर्ण खनन के खिलाफ प्रमाण सहित चेतावनी देते आ रहे हैं। 2010 में गठित जस्टिस एम.बी. शाह आयोग ने भी अवैध खनन की जांच कर ठोस सुझाव दिए थे।

राय ने बताया कि 2011 में गठित वन्यजीव प्रबंधन समिति, 2014 में बनी कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन समिति और सस्टेनेबल माइनिंग मैनेजमेंट प्लान सभी ने सारंडा के संरक्षण की जरूरत पर बल दिया। यहां तक कि 2007-08 में राज्य सरकार के वन विभाग ने 630 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को खनन प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि अब सर्वोच्च न्यायालय ने साफ निर्देश दिया है कि यदि 8 अक्टूबर 2025 तक सारंडा को सैंक्चुअरी घोषित नहीं किया गया, तो राज्य सरकार के मुख्य सचिव पर जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। राय ने इसे पूरी तरह उचित बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

राय ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार के वन अधिकारी भी खान विभाग की तरह काम कर रहे हैं। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट, देहरादून की रिपोर्ट के बावजूद छोटे अधिकारियों की समिति बनाकर अवैध रूप से बदलाव का प्रयास किया गया।

उन्होंने हाल ही में गठित झारखंड राज्य वन्यजीव परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। राय ने कहा कि 27 सदस्यों में मुश्किल से कोई वन्यजीव विशेषज्ञ है। 1 जून को विधानसभा में हुई बैठक में मुख्यमंत्री बमुश्किल कुछ मिनट ही रहे और उनकी गैरमौजूदगी में अवैध तरीके से बैठक चलाई गई तथा सारंडा सैंक्चुअरी पर प्रतिकूल निर्णय लिया गया।

राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करें और 8 अक्टूबर से पहले सारंडा को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करें। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य के वन सचिव ने 24 जून को सर्वोच्च न्यायालय में देरी के लिए माफी मांगते हुए इस दिशा में कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

 

 

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