जमशेदपुर: किसे पता था कि जिस बेटे को माता–पिता ने बुढ़ापे का सहारा समझा, वही एक दिन खुद बिस्तर पकड़ लेगा और पूरे परिवार को बेसहारा कर देगा। पोटका के पुटलुपुंग निवासी पंचानन मंडल वर्ष 2008 से अज्ञात बीमारी के कारण अंधे और लगभग बधिर हो चुके हैं। ना वे ठीक से देख पाते हैं, ना सुन पाते हैं। घर में उनके सहारे सिर्फ़ पत्नी मुकुल मंडल और बेटा दुलाल मंडल (28) थे।
घर की गाड़ी जैसे–तैसे चल रही थी कि अचानक अगस्त 2024 में बड़ा हादसा हो गया। हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के समीप रात 11 बजे एक हाईवा ने दुलाल को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दुलाल का उपचार ग्रामीणों की मदद से ओड़िशा में कराया गया, मगर हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अब दुलाल पूरी तरह अपाहिज, दोनों पैरों से लाचार होकर पिछले 13 महीने से बिस्तर पर पड़े हैं।
दुलाल रोते हुए कहते हैं—“अगर मेरे पिता ठीक होते, तो मेरा इलाज जरूर करा पाते।” बूढ़ी मां मुकुल मंडल एक साथ अंधे–बहरे पति और अपाहिज बेटे की देखभाल करते–करते पूरी तरह टूट चुकी हैं। घर में न पैसे हैं, न जमीन–जायदाद जिसे बेचकर इलाज कराया जा सके। उन्होंने बताया—“इलाज के लिए चारों ओर हाथ फैलाए, लेकिन अब लोग भी तंग आ गए। हम नहीं जानते आगे कैसे जी पाएंगे।”
आज एक समय ऐसा है कि इस परिवार का सहारा बना दुलाल भी खुद सहारे की उम्मीद में है। बूढ़ी मां की आंखें भर आती हैं—“अगर कोई फरिश्ता मिल जाए जो मेरे बेटे का इलाज करा दे… ताकि वह फिर से खड़ा होकर हमें संभाल सके।”
परिवार ने सरकार, समाजसेवियों और आम लोगों से आर्थिक सहायता की अपील की है, ताकि दुलाल मंडल का उचित इलाज हो सके और यह परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
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