कंपनी प्रबंधन को 15 सितंबर तक भुगतान पर पुनर्विचार की मिली मोहलत
जादूगोड़ा : यूसिलकर्मी अरुण बर्मा के निलंबन अवधि के निर्वाह भत्ते से जुड़े मामले में चाईबासा सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) शुभंक संजीव की अदालत में सुनवाई हुई। मामला वर्ष 2024 में 8 अक्टूबर से 5 नवंबर तक 28 दिनों की निलंबन अवधि के दौरान काटे गए निर्वाह भत्ते की राशि से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान यूसिल प्रबंधन की ओर से महेश कुमार, झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव सागर बेसरा तथा कंपनीकर्मी अरुण बर्मा ने अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सहायक श्रमायुक्त शुभंक संजीव ने यूसिल प्रबंधन को आगामी 15 सितंबर तक निलंबन अवधि में काटी गई राशि की वापसी पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के बाद झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव सागर बेसरा ने आरोप लगाया कि यूसिलकर्मी अरुण बर्मा पर झूठे मामले में आरोप लगाकर कंपनी प्रबंधन ने कथित रूप से साजिश के तहत उनके खिलाफ 28 दिनों के निलंबन की कार्रवाई की और वेतन से राशि काट ली।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन ने स्टैंडिंग ऑर्डर एवं श्रम नियमों की अनदेखी की। बेसरा ने कहा कि यदि कंपनी प्रबंधन आगामी 15 सितंबर तक निलंबन अवधि की करीब डेढ़ लाख रुपये की काटी गई राशि वापस नहीं करता है, तो यूनियन की ओर से आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर राशि की वसूली ब्याज सहित करने की मांग भी की जाएगी।
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