बहरागोड़ा : बुधवार को झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और सिंहभूम उत्कल सभा के महासचिव डॉ. दिनेश कुमार षडंगी ने एक प्रेस वक्तव्य जारी कर राज्य में भाषाई अल्पसंख्यकों (विशेषकर ओड़िया, बंगला और TRL भाषा) की उपेक्षा और उच्च शिक्षा में व्याप्त “अराजकता” पर गहरा क्षोभ प्रकट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत मातृभाषा में शिक्षा अनिवार्य होने के बावजूद प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक भाषाई शिक्षकों के रिक्त पदों को नहीं भरना दुर्भाग्यपूर्ण है; उन्होंने मांग की है कि सभी महाविद्यालयों में हर सत्र में कम से कम 10 भाषाई अल्पसंख्यक शिक्षकों की भर्ती सुनिश्चित की जाए और बहरागोड़ा महाविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में ठप्प पड़ी विज्ञान की पढ़ाई को पुनर्जीवित करने हेतु तत्काल पद सृजित किए जाएं। डॉ. षडंगी ने क्लस्टर व्यवस्था के कारण विषय चयन में आ रही बाधाओं, आउटसोर्सिंग के बजाय तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में स्थानीय निवासियों की स्थायी नियुक्ति और वित्त-रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल ‘शास्त्रीय भाषा’ ओड़िया को मात्र TRL समूह में रखने पर कोल्हान विश्वविद्यालय की कड़ी आलोचना की। वहीं मुख्यमंत्री से शिक्षा विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026’ को अविलंब लागू करने का आह्वान किया, ताकि बेलगाम विश्वविद्यालय प्रशासन पर नकेल कसी जा सके और गुणात्मक शिक्षा का सपना साकार हो सके।
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