प्रशासनिक लापरवाही व क्षेत्र के विकास के साथ धोखा
गुवा : ग्रामीण कार्य विभाग के चाईबासा प्रमंडल की हालत आज किसी अनाथ विभाग से कम नहीं रह गई है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधे श्याम मांझी के सेवा निवृत्त हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक न तो किसी नए कार्यपालक अभियंता की पदस्थापना की गई और न ही किसी योग्य अभियंता को प्रभारी का दायित्व सौंपा गया। इस प्रशासनिक शून्य का सीधा असर लगभग 400 करोड़ रुपये की सड़क योजनाओं पर पड़ा है, जो पूरी तरह ठप हो चुकी हैं । उक्त जानकारी भाजपा नेता सह पूर्व जिला अध्यक्ष गोविन्द पाठक ने देते हुए बताया कि वर्तमान स्थिति यह बन चुकी है कि चाईबासा और जगन्नाथपुर अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी प्रखंडों में सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राज्य संपोषित योजनाएं और अन्य महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क परियोजनाएं केवल फाइलों में सिमटकर रह गई हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली जनता को आवागमन की मूलभूत सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, लेकिन विभागीय अफसरों को इससे कोई सरोकार नहीं दिखता।सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार ने अपने विभागीय लिस्ट से ग्रामीण कार्य विभाग, चाईबासा प्रमंडल का नाम ही हटा दिया है।
अगर यह जानकारी सही है, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही बल्कि सीधे-सीधे इस क्षेत्र के विकास के साथ धोखा है।
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