- NEET के बाद नामांकन प्रक्रिया में भारी धांधली का आरोप, केंद्र सरकार से सख्त नियंत्रण की मांग
- नामांकन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप, स्वास्थ्य मंत्रालय से सुधार की मांग
भाजपा झारखंड प्रदेश किसान मोर्चा के प्रदेश नेता सह हिन्दू धर्म रक्षा मंच के प्रदेश मंत्री जय प्रकाश पांडेय ने भारत के मेडिकल कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के नामांकन में रिजर्वेशन के नाम पर बड़े पैमाने पर घपले हो रहे हैं, जिससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था भ्रष्टाचार की गिरफ्त में जाती दिख रही है। विशेष रूप से निजी मेडिकल कॉलेजों में एक-एक सीट पर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। इसका सीधा नुकसान योग्य और प्रतिभाशाली छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जिससे मेडिकल क्षेत्र में निराशा का माहौल बन गया है।
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जेपी पांडेय ने कहा कि वर्ष 2024 में NEET परीक्षा के दौरान जिस तरह से घोटाले और अनियमितताएं सामने आई थीं, उसने मेडिकल क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया था। बिहार के पटना, झारखंड के हजारीबाग, गुजरात सहित कई स्थानों पर फर्जी परीक्षार्थी यानी ‘मुन्ना भाई’ पकड़े गए थे। इन घटनाओं के कारण भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भारी आलोचना झेलनी पड़ी और कई योग्य छात्र चयन से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि उस समय मेडिकल छात्रों में सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और परीक्षा एजेंसियों के खिलाफ गहरा आक्रोश देखने को मिला था।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में NEET परीक्षा का आयोजन अपेक्षाकृत पारदर्शी रहा, जिससे सफल छात्रों में उत्साह है, लेकिन नामांकन प्रक्रिया में फिर से धांधली सामने आ रही है। आरोप है कि 40 अंक से भी कम लाने वाले छात्रों को रिजर्वेशन के नाम पर करोड़ों रुपये लेकर निजी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन दिया जा रहा है। यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसके तहत कमजोर और अनुभवहीन छात्रों को डॉक्टर बनाया जा रहा है। इससे न केवल प्रतिभा का हनन हो रहा है, बल्कि भविष्य में मरीजों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि वर्षों से ‘मुन्ना भाई डॉक्टर’ तैयार करने का यह खेल देश के स्वास्थ्य तंत्र को खोखला कर रहा है।
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जय प्रकाश पांडेय ने मांग की कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को निजी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया पर सीधा नियंत्रण और भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि करोड़ों रुपये की लूट पर रोक लग सके। साथ ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी पारदर्शिता और एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने नकली दवाओं के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताते हुए कहा कि दवा निर्माण कंपनियों और मेडिकल डिस्ट्रीब्यूटरों पर स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है। यदि दवा उद्योग और मेडिकल शिक्षा दोनों पर सख्त निगरानी नहीं की गई, तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट में फंस सकती है। मजबूत नियंत्रण से ही भारत वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूती से खड़ा हो सकेगा और मानव संसाधन की रक्षा संभव होगी।