- पेसा आंदोलकारियों को सम्मानित कर आदिवासियों ने जताई श्रद्धांजलि
- पेसा आंदोलन के वीरों को सम्मानित कर आदिवासियों ने जताई श्रद्धांजलि
जादूगोड़ा : बीते 2 जनवरी को झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद परंपरागत स्वशासन व्यवस्था से जुड़ी माझी परगना महाल, घाटशिला प्रखंड अध्यक्ष बहादुर किस्कू की अगुवाई में जादूगोड़ा रंकनी मंदिर के धूमकुडिया भवन में बैठक हुई। बैठक में 24 दिसंबर 1996 में संसद में पारित पेसा कानून के झारखंड में लागू होने के 25 साल बाद भी केंद्र और राज्य सरकार की विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। अध्ययन और विमर्श के बाद उपस्थित लोगों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। बहादुर किस्कू ने कहा कि आदिवासियों का मूल कानून पेसा कानून है, जिसे प्रभावी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है।
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जादूगोड़ा में माझी परगना महाल की बैठक में पेसा कानून पर हुई चर्चा
बैठक में इसके पूर्व दिल्ली राजघाट पर पेसा कानून पर 11 दिनों धरना-प्रदर्शन में शामिल डॉ. राजेंद्र प्रसाद टुडू और हरीश चंद्र भूमिज को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही पेसा आंदोलन में शहीद हुए लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर सुधन चंद्र सोरेन, सुधीर कुमार सोरेन, डुमनी मुर्मू, कुमार चंद्र मार्डी, कुंवर हासदा, कुशल सोरेन, मधु सोरेन, सोमनाथ सोरेन, सुदर्शन भूमिज और सिदेश्वर सरदार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।