- कथावाचक रसिया बाबा ने सुदामा चरित्र और श्रीकृष्ण लीला के माध्यम से मोक्ष और वैराग्य का संदेश दिया
जमशेदपुर : बिष्टुपुर तुलसी भवन में शारणागति परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन बुधवार को प्रसिद्ध कथावाचक रसिया बाबा ने व्यासपीठ से कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाया। कथा में सुदामा चरित्र, कुरुक्षेत्र लीला और श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद के माध्यम से निश्छल मित्रता, भगवत्प्राप्ति, भक्ति और वैराग्य का गहरा सार बताया गया। रसिया बाबा ने कहा कि सुदामा की दरिद्रता में भी अटूट मित्रता और कृष्ण की लीलाओं से कर्तव्यबोध हमें सिखाता है कि जीवन में मोक्ष केवल भगवत्प्रेम से ही प्राप्त होता है। कथा के समापन पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 500 भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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सुदामा चरित्र से सिखी सच्ची मित्रता और भगवान की लीला का महत्व
रसिया बाबा ने कथा में विशेष रूप से बताया कि सच्ची मित्रता और भक्ति का कोई मोल नहीं होता। कृष्ण, सुदामा की दरिद्रता देखकर भावुक हो जाते हैं और उन्हें बिना मांगे ही समृद्धि प्रदान करते हैं, जिससे सुदामा का जीवन बदल जाता है। कथा सुनकर पंडाल में उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान की प्रत्येक लीला जीव को सांसारिक बंधनों से मुक्त करने वाली है और जब तक जीव मोह में फँसा रहता है, उसके मोक्ष के द्वार बंद रहते हैं। प्रभु के मंगलमय चरित्र से अनासक्त जीवन जीने और भक्ति में लीन रहने की प्रेरणा मिलती है।
भगवान की लीला और सच्ची भक्ति से जीवन में मिलती है शांति और मोक्ष
सात दिनों तक चले इस भागवत कथा आयोजन को सफल बनाने में कई समाजसेवी और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों का योगदान रहा। बृजमोहन बागड़ी, विमल रिंगसिया अग्रवाल, प्रदीप मित्तल (बंटी), मनोज शर्मा, सतीश जायसवाल, अजय सरायवाला, राजकुमार दोदराजका, विश्वनाथ महेश्वरी, घनश्याम पटवारी, प्रमीला आगीवाल, तनय झवर, अरुण धूत, राजेश गढ़वाल, नथमल शर्मा, विष्णु अग्रवाल, प्रदीप महेश्वरी, सुनील महेश्वरी, महेश केडिया, मुन्ना तापड़िया एवं प्रमिला आगीवाल सहित अन्य लोगों ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
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भागवत कथा में समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों का योगदान सराहनीय
कार्यक्रम के अंत में रसिया बाबा ने उपस्थित भक्तों को यह संदेश दिया कि जीवन में सुख-दुःख, धन-निर्धन सभी माया हैं और केवल भगवत्प्रेम ही सत्य है। उन्होंने कहा कि सुदामा और कृष्ण जैसी मित्रता जीवन में भक्ति और वैराग्य की शिक्षा देती है, और प्रभु के चरणों में प्रेम ही मोक्ष के द्वार खोलता है। हवन यज्ञ और भंडारे के माध्यम से भक्तों ने भक्ति भाव का अनुभव किया और समाज में भक्ति और सच्चाई का संदेश साझा किया।