- सुरक्षित और सशक्त महिला- सशक्त झारखंड के निर्माण के लिए प्रशासन ने लिया बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का संकल्प
- सिदगोड़ा में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान का सामूहिक संकल्प
जमशेदपुर : सुरक्षित एवं सशक्त महिला- सशक्त झारखंड के उद्देश्य से ‘बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान’ के अंतर्गत बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम अर्नव मिश्रा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संध्या रानी समेत बीडीओ, सीओ, मुखिया, ग्राम प्रधान एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं और पंचायत सचिव भी शामिल हुए।
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सिदगोड़ा में बाल विवाह रोकथाम पर जिले स्तर की बैठक
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि परंपराएं तभी सम्मान के योग्य हैं जब वे मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा करें। बाल विवाह सामाजिक कुरीति के साथ-साथ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की तथा 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है और इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और सरकारी तंत्र इस दिशा में पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं और समाज से भी इस कुरीति के खिलाफ आगे आने की उम्मीद है।
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बाल विवाह रोकने में समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी : उप विकास आयुक्त
अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम ने कहा कि बाल-विवाह रोकने के लिए चर्चाओं से ज्यादा जमीनी स्तर पर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि कितने लोग अपने आसपास हो रहे बाल विवाह का विरोध करते हैं या इसे रोकने के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि कानून और सरकारी तंत्र अपना दायित्व निभा रहे हैं, अब समाज की जिम्मेदारी भी अहम है। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि राज्य में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है, जो चिंताजनक है।
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झारखंड में बाल विवाह की दर 32.2%, प्रशासन ने ली सख्त कार्रवाई की तैयारी
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर अधिकारियों ने कानून की जानकारी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व पर जोर दिया। सभी ने मिलकर यह संकल्प किया कि बाल विवाह को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा और समाज में जागरूकता फैलाकर इस सामाजिक बुराई का निष्पक्ष रूप से विरोध किया जाएगा।