जमशेदपुर: झारखंड में ओबीसी आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल उठ गया है। पूर्वी जमशेदपुर की विधायक पूर्णिमा साहू ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न का जवाब सरकार द्वारा दिए जाने पर इसे ‘बहानेबाज़ी’ करार दिया। विधायक ने पूछा कि 2019 में शुरू हुए आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया कब पूरी होगी और इसके आधार पर ओबीसी को आरक्षण कब तक मिलेगा।
सरकार ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण सर्वेक्षण पूरा नहीं हो सका। पूर्णिमा साहू ने इसे हास्यास्पद बताते हुए कहा कि कोरोना महामारी बीते चार साल से अधिक समय से खत्म हो चुकी है, फिर भी सरकार ने कोई ठोस कारण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि झारखंड सरकार पिछड़ा वर्ग के मुद्दों पर गंभीर नहीं है।
विधायक ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां करुणानिधि सरकार ने समय पर आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण कराकर विधानसभा से बिल पास कराया और 69% ओबीसी आरक्षण लागू किया, जबकि राष्ट्रीय सीमा केवल 50% है। पूर्णिमा साहू ने सुझाव दिया कि झारखंड सरकार भी तमिलनाडु मॉडल अपनाकर ईमानदारी से सर्वेक्षण कराए तो आरक्षण पर कोई रोक नहीं लग सकती।
पूर्णिमा साहू ने कहा कि झारखंड में जनसंख्या आधारित आरक्षण लागू करने के लिए तत्काल सर्वेक्षण आवश्यक है। उन्होंने सरकार से अपील की कि पिछड़ों के अधिकार और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए तुरंत कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ सर्वेक्षण का नहीं है, बल्कि पिछड़े वर्ग के उचित हक और सम्मान का है।