सरायकेला: टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-33) पर चांडिल गोलचक्कर से पाटा गांव तक पिछले तीन महीनों से लगातार जाम की समस्या बनी हुई है। लगभग डेढ़ किलोमीटर के इस हिस्से में जगह-जगह तालाबनुमा गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहनों की रफ्तार रेंगती रहती है। दोपहिया वाहन चालकों को तो सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाटा टोल प्लाजा के निर्माण के बाद से स्थिति और खराब हुई है। टोल प्लाजा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधीन है। करीब चार साल पहले आरकेएस कंपनी को मरम्मत का ठेका दिया गया था, लेकिन आज तक काम अधूरा है। कंपनी की लापरवाही के कारण सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।

कंपनी पर आरोप, एनएचएआई मौन
स्थानीय निवासियों ने कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। टोल प्लाजा के कुछ लेन अस्थायी रूप से बंद हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और बढ़ जाता है। आरकेएस कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर जितेंद्र सिंह का कहना है कि मरम्मत कार्य एक वर्ष के लिए था, लेकिन बारिश और तकनीकी कारणों से कालीकरण का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
मंत्री के सुरक्षाकर्मियों की गुंडागर्दी, दो टोल कर्मचारी घायल
घटना के दौरान शुक्रवार शाम झारखंड सरकार के एक मंत्री का काफिला जब जाम में फंस गया, तो उन्होंने टोल कर्मियों से बहस शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने टोल कर्मियों की जमकर पिटाई कर दी। इस घटना में दो कर्मी घायल हो गए, जबकि अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।
टोल प्लाजा मैनेजर मोहन सिंह ने बताया कि मंत्री की गाड़ी जाम में फंसने पर गुस्से में सुरक्षाकर्मियों ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया। घटना के बाद से टोल कर्मियों में भय का माहौल है।

जनता परेशान, अधिकारी मौन
एनएच-33 झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा जैसे कई राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। बावजूद इसके, सड़क की मरम्मत और जाम की समस्या पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह मार्ग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का भी नियमित आवागमन वाला रास्ता है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।




















































