नई दिल्ली: राजधानी रांची के अरगोड़ा स्थित श्री दुर्गा पूजा समिति और रावण दहन समिति का इस बार का पंडाल श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के साथ-साथ भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। समिति ने इस वर्ष ऐसा थीम तैयार किया है जो एक मंदिर से ज्यादा पुस्तक महल जैसा दिखाई देता है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ ज्ञान के खजाने से भी रूबरू हो रहे हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
समिति ने अपने इस अनूठे प्रयोग के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि असली ज्ञान किताबों में है, न कि सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन पर।
पंडाल में वेद, पुराण, इतिहास, साहित्य और आधुनिक विषयों से जुड़ी करीब 18 हजार किताबें सजाई गई हैं, जो हर उम्र के लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
अध्यक्ष बोले – “किताबों से जुड़ना ही असली साधना”
पूजा समिति के अध्यक्ष पंकज साहू ने बताया कि आज की पीढ़ी तकनीक में डूबी हुई है और किताबों से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने इस पंडाल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि किताबें ही असली गुरु हैं। जब हम पुस्तकों से जुड़ते हैं, तो अपने संस्कार और ज्ञान से भी जुड़ते हैं।”
युवा और बच्चों में उत्साह
पंडाल में पहुंचे युवा और बच्चे इस ज्ञान-थीम को लेकर खासे उत्साहित हैं। समाज, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ी सैकड़ों पुस्तकें यहां लोगों को न केवल आकर्षित कर रही हैं, बल्कि उन्हें पढ़ने की प्रेरणा भी दे रही हैं। श्रद्धालु मां दुर्गा से आशीर्वाद लेने के साथ-साथ इन किताबों के संसार में भी गोता लगा रहे हैं।
रांची का पंडाल बना मिसाल
इस वर्ष अरगोड़ा का यह पंडाल राजधानी के सबसे अनोखे और सार्थक पंडालों में शामिल हो गया है। जहां बाकी जगहों पर पंडालों की भव्यता चर्चा में है, वहीं यहां का ज्ञानमय पंडाल लोगों को यह याद दिला रहा है कि भक्ति के साथ शिक्षा और विचार भी जरूरी हैं।
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