सरायकेला : कोल्हान के विभिन्न जगह पर सोमवार को वट सावित्री की पूजा की जा रही है. यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। यह पूजा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं।
वट सावित्री पूजा का महत्व

पति की लंबी उम्र – इस पूजा का मुख्य उद्देश्य अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करना है।
वट वृक्ष की पूजा, वट वृक्ष को पवित्र माना जाता है, और इसकी पूजा करने से महिलाओं को अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और इसके चारों ओर सूत लपेटती हैं। पूजा के बाद महिलाएं अपने पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं।
वट सावित्री पूजा का संदेश
पति-पत्नी के प्रेम ,यह पूजा पति-पत्नी के प्रेम और संबंधों को मजबूत बनाने का संदेश देती है। यह पूजा महिलाओं की निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है।
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