West Singhbhum: माहवारी से जुड़ी चुप्पी तोड़ने निकले ‘झारखंड के पैडमैन’, पीरियड एंड साइंस’ अभियान का शुभारंभ

 

चाईबासा: विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित पश्चिमी सिंहभूम जिले के पांड्राशाली गांव में एक अनूठी पहल की गई. कल्पना चावला साइंस क्लब के प्रांगण में निश्चय फाउंडेशन द्वारा ‘पीरियड एंड साइंस’ नामक जनअभियान की शुरुआत की गई. इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और सुविधावंचित क्षेत्रों में किशोरी स्वास्थ्य, माहवारी स्वच्छता और विज्ञान शिक्षा को एक साथ जोड़कर बच्चों और महिलाओं को सशक्त बनाना है.

विज्ञान और पीरियड: साथ-साथ शिक्षा की दिशा में
इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला में किशोरियों, महिलाओं और बच्चों को माहवारी से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं, स्वच्छता के मानकों, महिला स्वास्थ्य, बालिका शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रशिक्षित किया गया. कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रोजेक्ट बाला की ओर से पुनः उपयोग योग्य सैनिटरी पैड और विज्ञान पर केंद्रित शैक्षणिक पुस्तकें भी भेंट की गईं.

सम्मानित उपस्थिति
इस कार्यक्रम में कल्पना चावला साइंस क्लब के संस्थापक प्रधान बिरुवा, निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक और झारखंड के ‘पैडमैन’ के नाम से प्रसिद्ध तरुण कुमार, ट्राइबल पैडमैन बैद्यनाथ हांसदा और केरूवाडूंगरी पंचायत के मुखिया कान्हु मुर्मू विशेष रूप से उपस्थित रहे.

तरुण कुमार ने कहा, “हमारी कोशिश सिर्फ जानकारी देने की नहीं है, बल्कि हम ग्रामीण प्रतिभाओं को चिन्हित कर उन्हें विज्ञान में उच्च शिक्षा और शोध की ओर प्रेरित करेंगे. पीरियड को लेकर शर्म और चुप्पी तोड़ना अब जरूरी हो गया है.”

कार्यक्रम में मुखिया कान्हु मुर्मू ने कहा, “ऐसे अभियानों से बच्चों और महिलाओं की सोच में बदलाव आया है. हम इस मुहिम को पंचायत स्तर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

8 वर्षों की सतत यात्रा: निश्चय फाउंडेशन की उपलब्धियां
कार्यक्रम के माध्यम से निश्चय फाउंडेशन ने अपने आठवें स्थापना दिवस को भी चिह्नित किया. संस्था ने पिछले आठ वर्षों में ‘एक पैड, एक पेड़’, ‘पीरियड पुस्तकालय’, ‘मिक्स जेंडर क्रिकेट’, किशोरी स्वास्थ्य जागरूकता और महिला सशक्तिकरण जैसे अभियानों के जरिये राज्यभर में एक लाख से अधिक महिलाओं और किशोरियों तक अपनी पहुंच बनाई है.

गांव से विज्ञान तक: नई आशा, नई दिशा
कार्यक्रम में बड़ा लागड़ा पंचायत के विभिन्न गांवों से लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इस जनअभियान के माध्यम से ग्रामीण समाज में व्याप्त अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और मौन को चुनौती देने की एक सशक्त शुरुआत हुई है. ‘पीरियड एंड साइंस’ जनअभियान न सिर्फ स्वास्थ्य की बात करता है, बल्कि वैज्ञानिक चेतना की नींव भी डालता है — जो आज के समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है.

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